Business Desk – देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है. मई महीने में चार बार दाम बढ़ाने के बावजूद सरकारी तेल विपणन कंपनियां (OMCs) अभी भी नुकसान झेल रही हैं. ऐसे में आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल के दाम फिर बढ़ाए जा सकते हैं.

features_1853120-petrol-diesel-1jpg1712637125

रिपोर्ट के अनुसार, तेल कंपनियों को वर्तमान में पेट्रोल पर करीब 5.5 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर लगभग 4.5 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है. इसी नुकसान की भरपाई के लिए भविष्य में कीमतों में और बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है. मई महीने के दौरान तेल कंपनियां पेट्रोल और डीजल के दामों में कुल मिलाकर करीब 7.5 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी कर चुकी हैं.

अलग शहरों में पेट्रोल डीजल के कीमत

देश के प्रमुख महानगरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में अंतर बना हुआ है. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है. वहीं देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में पेट्रोल 103.50 रुपये प्रति लीटर और डीजल 90.30 रुपये प्रति लीटर के भाव पर उपलब्ध है. कोलकाता में पेट्रोल की कीमत 105.41 रुपये प्रति लीटर और डीजल 92.20 रुपये प्रति लीटर दर्ज की गई है.

उत्तर प्रदेश और बिहार के प्रमुख शहरों की बात करें तो नोएडा में पेट्रोल 94.85 रुपये प्रति लीटर और डीजल 87.98 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है. राज्य की राजधानी लखनऊ में पेट्रोल 94.69 रुपये और डीजल 87.81 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर है. वहीं बिहार की राजधानी पटना में पेट्रोल 105.23 रुपये प्रति लीटर और डीजल 91.49 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है, जो देश के कई अन्य शहरों की तुलना में अधिक है.

कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है. युद्ध शुरू होने से पहले कच्चे तेल का भाव करीब 70 डॉलर प्रति बैरल था, जो अब 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुका है. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण तेल कंपनियों की लागत बढ़ी है और उन पर वित्तीय दबाव भी बढ़ गया है.

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum Corporation और Hindustan Petroleum Corporation को मिलाकर प्रतिदिन सैकड़ों करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है. पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार हालिया मूल्य वृद्धि के बाद भी कंपनियों को संयुक्त रूप से प्रतिदिन लगभग 750 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है.

LPG सिलेंडर पर 650 रुपये तक का नुकसान

पेट्रोल और डीजल के अलावा एलपीजी पर भी तेल कंपनियों का दबाव बढ़ गया है. पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी के कारण तेल कंपनियों को प्रत्येक एलपीजी सिलेंडर पर करीब 650 रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है. वहीं एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) पर भी लगभग 30 रुपये प्रति लीटर का नुकसान बताया गया है.

76 दिन तक नहीं बढ़े थे दाम

पश्चिम एशिया में युद्ध और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बावजूद सरकारी तेल कंपनियों ने करीब 76 दिनों तक पेट्रोल और डीजल के दाम नहीं बढ़ाए थे. इसके बाद मई में चार चरणों में कीमतों में बढ़ोतरी की गई. इसी अवधि में घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम भी बढ़ाए गए.

कमर्शियल गैस सिलेंडर भी हुआ महंगा

1 जून को कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत में 40 रुपये की बढ़ोतरी की गई. इससे पहले भी कमर्शियल सिलेंडर के दामों में लगभग 900 रुपये तक का इजाफा हो चुका है. मार्च से अब तक कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में 47 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है.

आगे क्या?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो तेल कंपनियों पर दबाव जारी रहेगा. ऐसे में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में आगे भी बढ़ोतरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.