कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। हरियाणा के गांवों में भंडारे (धार्मिक भोजन आयोजन) कोई नई बात नहीं हैं। यहां लोग अपनी श्रद्धा के अनुसार देवी-देवताओं के नाम पर प्रसादी (भोजन) का आयोजन करते हैं और सेवा भाव से जुड़ते हैं। लेकिन यमुनानगर जिले के खेड़की ब्राह्मण गांव से सामने आई एक तस्वीर और वीडियो ने भक्ति की असली परिभाषा को एक बार फिर जीवंत कर दिया है। यह सिर्फ एक भंडारे की कहानी नहीं, बल्कि सेवा, संस्कार और सच्ची श्रद्धा का ऐसा उदाहरण है, जिसे देखकर हर कोई प्रभावित हुए बिना नहीं रह पा रहा।

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करीब 45 सेकंड के इस वीडियो में आम भंडारों जैसा ही दृश्य दिखाई देता है—पंगत में बैठे लोग प्रसादी ग्रहण कर रहे हैं, चारों ओर हलचल है, सेवा में लगे लोग इधर-उधर व्यस्त हैं। लेकिन इसी बीच एक ऐसा दृश्य सामने आता है, जो इस पूरे आयोजन को खास बना देता है। पंगत के बीच एक शख्स हाथ में तौलिया लिए खड़ा है और लगातार श्रद्धालुओं को हवा कर रहा है, ताकि गर्मी में किसी को परेशानी न हो, मक्खियां भोजन पर न बैठें और हर व्यक्ति आराम से प्रसादी ग्रहण कर सके। यही छोटा सा दिखने वाला काम इस पूरी कहानी की सबसे बड़ी ताकत बन जाता है।

यह शख्स हैं मोहन लाल सैनी, जो इसी गांव के निवासी हैं। खास बात यह है कि वे आजकल अपने बेटे के साथ ऑस्ट्रेलिया में रहते हैं और कुछ समय के लिए गांव आए हुए हैं। विदेश में रहकर भी अपने गांव और परंपराओं से उनका जुड़ाव कितना गहरा है, यह उनकी इस सेवा से साफ झलकता है। यहां गौर करने वाली बात यह भी है कि वे किसी मनोकामना की पूर्ति के लिए या किसी दिखावे के लिए यह सेवा नहीं कर रहे, बल्कि उनके भीतर भगवान के प्रति गहरी आस्था और भक्तों के प्रति सम्मान की भावना है।

गांव में हाल ही में पीतल से बने खेड़ा बाबा की स्थापना की गई है, जिसे लेकर पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल बना हुआ है। इसी अवसर पर भंडारे का आयोजन किया गया, जहां यह दृश्य सामने आया। ग्रामीणों के अनुसार, मोहन लाल सैनी केवल भंडारे के दौरान ही सक्रिय नहीं दिखे, बल्कि खेड़ा बाबा के देवस्थल पर चल रहे निर्माण कार्य में भी कई दिनों से राजमिस्त्रियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने श्रमदान (स्वेच्छा से किया गया श्रम) के जरिए अपनी भागीदारी निभाई, जो आज के समय में कम ही देखने को मिलता है।

वहीं, इस भंडारे में गांव के लोगों की एकजुटता भी साफ नजर आई। हर व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार सेवा में जुटा हुआ था—किसी ने प्रसादी परोसने की जिम्मेदारी संभाली, किसी ने बैठने की व्यवस्था देखी, तो कोई साफ-सफाई में लगा रहा। महिलाओं से लेकर बुजुर्गों और युवाओं तक, हर किसी ने इस आयोजन को सफल बनाने में अपना योगदान दिया। यही सामूहिक भावना इस भंडारे को खास और यादगार बनाती है।

खेड़की ब्राह्मण गांव में स्थापित पीतल का खेड़ा बाबा अब आसपास के क्षेत्रों में भी चर्चा का विषय बन गया है। पड़ोसी गांवों से लोग यहां दर्शन करने पहुंच रहे हैं और इस नई स्थापना को देखने के लिए उत्साहित हैं। धार्मिक आस्था के साथ-साथ यह स्थान अब सामाजिक जुड़ाव का केंद्र भी बनता नजर आ रहा है।

आज के समय में जब लोग सुविधा और दिखावे की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं, ऐसे में मोहन लाल सैनी जैसे उदाहरण यह याद दिलाते हैं कि सच्ची भक्ति पूजा-पाठ तक सीमित नहीं होती, बल्कि सेवा में नजर आती है। और जब पूरे गांव की एकजुटता उस भक्ति से जुड़ जाए, तो वह आयोजन सिर्फ एक भंडारा नहीं, बल्कि एक प्रेरणा बन जाता है।

इस आयोजन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि गांवों में आज भी भाईचारा, सेवा और श्रद्धा की भावना जीवित है—और यही हमारी असली ताकत और पहचान भी है।