Automobile Desk: शोरूम से नई कार निकालने के बाद हर किसी का मन करता है कि उसमें अपने हिसाब से कुछ बदलाव कराए जाएं। कोई धांसू बेस वाला म्यूजिक सिस्टम ढूंढने लगता है, तो किसी को गाड़ियों में फैंसी लाइट्स और अलॉय व्हील्स लगवाने का चस्का होता है। दिखने में यह सब बड़ा कूल लगता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि लोकल मार्केट से कराया गया एक छोटा सा बदलाव भी आपकी कार की वारंटी का खेल बिगाड़ सकता है?

अक्सर जब हम नई कार खरीदते हैं, तो कंपनियां 3 साल या 1 लाख किलोमीटर जैसी तय सीमा के लिए वारंटी देती हैं। इस दौरान गाड़ी में कोई तकनीकी या मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट आता है, तो कंपनी उसे बिना पैसे लिए ठीक करती है। दिक्कत तब शुरू होती है जब हम बिना सोचे-समझे बाहर के मैकेनिक से गाड़ी के ओरिजिनल सेटअप में छेड़छाड़ करवा लेते हैं।
इंजन ट्यूनिंग और परफॉर्मेंस मॉडिफिकेशन का रिस्क
बहुत से युवाओं को गाड़ी की पिकअप और स्पीड बढ़ाने का भूत सवार होता है। इसके लिए वे इंजन री-मैपिंग, एग्जॉस्ट बदलना या परफॉर्मेंस चिप्स लगवाने जैसे काम कराते हैं। कंपनी जिस क्षमता और लोड के हिसाब से इंजन को डिजाइन करती है, ये बदलाव उस पर जरूरत से ज्यादा दबाव डालते हैं। नतीजा यह होता है कि इंजन के अंदरूनी पार्ट्स तेजी से घिसने लगते हैं। अगर ऐसे किसी मॉडिफिकेशन के बाद इंजन में खराबी आती है, तो सर्विस सेंटर वाले सीधे हाथ खड़े कर देंगे और भारी-भरकम बिल आपके माथे आ गिरेगा।
वायरिंग के साथ कट-पेस्ट की गलती पड़ेगी भारी
आजकल कारों में सबसे ज्यादा काम इलेक्ट्रिकल एक्सेसरीज का होता है। नए स्पीकर, एम्पलीफायर या एम्बिएंट लाइट्स फिट करते वक्त मैकेनिक अक्सर गाड़ी की मूल वायरिंग को काट देते हैं या उसमें कट लगाकर नए तार जोड़ते हैं। लोकल दुकानों पर अक्सर काम चलाऊ काम होता है। एक भी तार अगर ढीला रह गया या गलत जुड़ा, तो पूरी कार का फ्यूज उड़ सकता है और शॉर्ट सर्किट की वजह से आग तक लग सकती है। यदि कंपनी की जांच में यह साबित हो गया कि खराबी बाहर से कटी हुई वायरिंग की वजह से हुई है, तो क्लेम मिलना भूल जाइए।
वारंटी रद्द होने का असली सच क्या है?
लोगों के बीच यह बहुत बड़ी गलतफहमी है कि गाड़ी में एक भी आफ्टरमार्केट चीज लगवाई तो पूरी वारंटी ही खत्म हो जाएगी। ऐसा बिल्कुल नहीं है। नियम सीधा है—जिस बाहरी पार्ट की वजह से गाड़ी के ओरिजिनल हिस्से को नुकसान पहुंचेगा, सिर्फ उसी हिस्से का क्लेम खारिज होगा। मान लीजिए आपने बाहर से फ्लोर लेमिनेशन या सीट कवर लगवाए हैं, तो इससे आपकी कार के गियरबॉक्स या सस्पेंशन की वारंटी पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। लेकिन अगर आपने गलत साइज के आफ्टरमार्केट टायर लगवाए हैं और उससे सस्पेंशन खराब हुआ, तो कंपनी उसका खर्चा नहीं उठाएगी।
बिना झंझट शौक कैसे पूरा करें?
अगर आपको कार कस्टमाइज कराने का बहुत ज्यादा शौक है, तो लोकल मैकेनिक के पास जाने के बजाय सीधे कंपनी के ऑथराइज्ड सर्विस सेंटर जाएं। आज लगभग हर ऑटो कंपनी अपनी ऑफिशियल एक्सेसरीज बेचती है। भले ही ये थोड़ी महंगी पड़ें, लेकिन इन्हें लगवाने से वारंटी सुरक्षित रहती है। अगर बाहर से कोई इलेक्ट्रिकल काम कराना भी पड़े, तो मैकेनिक से साफ कह दें कि ‘कपलर-टू-कपलर’ फिटिंग ही करे, ताकि गाड़ी का एक भी मूल तार काटने की नौबत न आए।



