रायपुर। UPI लेन-देन शुल्क को लेकर आए हालिया आधिकारिक बयान के बाद छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने चिंता जताई है। चेम्बर के प्रदेश अध्यक्ष सतीश थौरानी ने कहा कि उपभोक्ताओं के लिए डिजिटल लेन-देन को शून्य शुल्क पर रखा गया है, लेकिन दूसरी ओर ₹2,000 से अधिक के लेन-देन पर लगने वाला MDR (Merchant Discount Rate) शुल्क व्यापारियों पर डाला जा रहा है।

सतीश थौरानी ने कहा कि वर्तमान समय में खुदरा और थोक व्यापार बेहद सीमित लाभ मार्जिन पर संचालित हो रहा है। ऐसे में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए व्यापारियों द्वारा निभाई गई भूमिका को देखते हुए उन पर अतिरिक्त वित्तीय भार डालना उचित नहीं है।

उन्होंने कहा कि 0.4 प्रतिशत MDR शुल्क या ₹300 तक की कैपिंग सीधे तौर पर व्यापारियों की लागत बढ़ाती है। एक ओर देश में डिजिटल अर्थव्यवस्था और कैशलेस लेन-देन को बढ़ावा दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर डिजिटल भुगतान व्यवस्था के संचालन से जुड़ी लागत व्यापारिक वर्ग पर डाली जा रही है।

चेम्बर प्रदेश अध्यक्ष ने केंद्र सरकार और वित्त मंत्रालय से मांग की है कि व्यापारियों के लिए भी सभी UPI लेन-देन पर MDR शुल्क पूरी तरह शून्य (0%) किया जाए। साथ ही डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास और संचालन से जुड़ा खर्च बैंकों एवं सरकार द्वारा वहन किया जाए, न कि व्यापारियों पर इसका अतिरिक्त भार डाला जाए।

छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने बताया कि वह जल्द ही इस विषय को लेकर केंद्रीय नेतृत्व और NPCI (भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम) को विस्तृत ज्ञापन सौंपेगा। चेम्बर का कहना है कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था को आगे बढ़ाने में व्यापारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है और उनकी लागत को ध्यान में रखते हुए शुल्क व्यवस्था तय की जानी चाहिए।

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