दिल्ली में रिहायशी और व्यावसायिक क्षेत्रों में बढ़ते अवैध निर्माण तथा मालवीय नगर में हुई आगजनी की घटना को लेकर मॉनिटरिंग कमिटी ने कई महीनों बाद अपनी रिपोर्ट तैयार की है। रिपोर्ट में राजधानी के भवन सुरक्षा ढांचे पर गंभीर चिंता जताते हुए पुराने नियमों में व्यापक बदलाव की आवश्यकता बताई गई है। कमिटी ने कहा है कि दिल्ली को वास्तव में विश्वस्तरीय शहर बनाने के लिए सुरक्षित और आधुनिक बिल्डिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करना जरूरी है। इसके लिए मौजूदा बिल्डिंग बायलॉज और मास्टर प्लान की समीक्षा कर उन्हें वर्तमान जरूरतों के अनुरूप अपडेट किया जाना चाहिए।

रिपोर्ट के अनुसार, ऊंची रिहायशी और कमर्शियल इमारतों की सुरक्षा और निगरानी के लिए लागू यूनिफाइड बिल्डिंग बायलॉज अब करीब 10 साल पुराने हो चुके हैं। इस दौरान निर्माण तकनीकों, जनसंख्या घनत्व और सुरक्षा मानकों में कई बदलाव आए हैं, लेकिन नियमों में उसी अनुपात में संशोधन नहीं किया गया।

दिल्ली के मालवीय नगर में हुए भीषण अग्निकांड को लेकर मॉनिटरिंग कमिटी ने अपनी रिपोर्ट में बड़ा खुलासा किया है। कमिटी के अनुसार, जिस इमारत में आग लगी थी उसका निर्माण अवैध रूप से किया गया था और वहां पर्याप्त निकासी (एग्जिट) व्यवस्था मौजूद नहीं थी। इसी वजह से हादसा इतना भयावह साबित हुआ और 22 लोगों की जान चली गई, जिनमें 15 विदेशी नागरिक भी शामिल थे।

कमिटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि राजधानी में रिहायशी इलाकों में बढ़ती व्यावसायिक गतिविधियां कई गंभीर समस्याओं को जन्म दे रही हैं। रिपोर्ट में सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि आवासीय क्षेत्रों में चल रही कमर्शियल गतिविधियों को या तो पूरी तरह रोका जाए या फिर सख्ती से सीमित किया जाए। कमिटी का मानना है कि अनियंत्रित व्यावसायिक गतिविधियों के कारण ट्रैफिक जाम, अतिक्रमण और सुरक्षा संबंधी जोखिम लगातार बढ़ रहे हैं।

बिल्डिंग नियमों में बदलाव की सिफारिश

रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली में सभी प्रकार की इमारतों का निर्माण फिलहाल वर्ष 2016 के यूनिफाइड बिल्डिंग बायलॉज के तहत किया जा रहा है, लेकिन बदलती शहरी जरूरतों और सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए इन नियमों को अब अपडेट करना बेहद जरूरी हो गया है। कमिटी का मानना है कि मौजूदा भवन नियम लगभग एक दशक पुराने हो चुके हैं और इन्हें आधुनिक सुरक्षा मानकों के अनुरूप संशोधित किया जाना चाहिए।

मॉनिटरिंग कमिटी ने बताया कि दिल्ली को एक ग्लोबल सिटी के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से मास्टर प्लान-2021 तैयार किया गया था। इसके तहत कुछ रिहायशी इलाकों में सीमित स्तर पर व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति दी गई थी। हालांकि, प्रभावी निगरानी और नियंत्रण के अभाव में यह व्यवस्था अब कई क्षेत्रों में समस्या का कारण बन रही है। जिन रिहायशी इलाकों में लोकल शॉपिंग सेंटर विकसित किए गए थे, वहां की ऊपरी मंजिलों का उपयोग मूल रूप से आवासीय उद्देश्यों के लिए होना था। लेकिन वर्तमान में इन मंजिलों पर भी बड़े पैमाने पर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इससे पार्किंग, ट्रैफिक जाम, अतिक्रमण और अग्नि सुरक्षा जैसी समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं।

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