Business Desk – Plastic Currency Note : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अगले साल अप्रैल-मई 2027 के बीच देश में पॉलीमर (Plastic) करेंसी नोट लॉन्च करेगा। इसकी जानकारी RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की तीन दिन चली बैठक के बाद दी।

उन्होंने बताया कि शुरुआत कम मूल्य वाले करेंसी नोटों से होगी, क्योंकि 10, 20 और 50 रुपए के नोट सबसे ज्यादा इस्तेमाल होते हैं और जल्दी गंदे या फट जाते हैं। नए पॉलीमर नोट अधिक टिकाऊ होंगे और लंबे समय तक चलेंगे।

पहले कम मूल्य वाले नोट होंगे जारी

RBI गवर्नर ने कहा कि शुरुआत में कम वैल्यू के पॉलीमर नोट जारी किए जाएंगे। इनका बाजार में सबसे ज्यादा सर्कुलेशन होता है। उन्होंने बताया कि दुनिया के कई देशों में ये नोट कई दशकों से सफलतापूर्वक इस्तेमाल किए जा रहे हैं।

गवर्नर के मुताबिक, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों में पॉलीमर करेंसी नोट 30 साल से भी अधिक समय से उपयोग में हैं। भारत में कागजी नोट, खासकर 10, 20 और 50 रुपए के नोट जल्दी गंदे हो जाते हैं या फटने लगते हैं। पॉलीमर नोट आने से यह समस्या काफी हद तक खत्म हो जाएगी।

पानी से खराब नहीं होंगे, सरकार का खर्च भी घटेगा

संजय मल्होत्रा ने कहा कि पॉलीमर नोटों की सबसे बड़ी खासियत उनकी लंबी उम्र है। ये नोट पानी, नमी, धूल और गंदगी से जल्दी खराब नहीं होंगे। बार-बार नए नोट छापने की जरूरत भी कम पड़ेगी, जिससे सरकार और RBI का खर्च घटेगा।

सवाल-जवाब: Plastic Currency Notes से जुड़े 5 बड़े सवाल

सवाल 1: पॉलीमर नोट क्या होते हैं और इन्हें क्यों लाया जा रहा है?

जवाब: पॉलीमर बैंकनोट्स कागज की जगह एक विशेष प्लास्टिक मटेरियल यानी Polymer Substrate पर छापे जाते हैं। देखने और छूने में ये सामान्य नोट जैसे ही होते हैं, लेकिन कहीं ज्यादा मजबूत और टिकाऊ होते हैं।

  1. लंबी उम्र

ये नोट पानी, धूल और गंदगी से जल्दी खराब नहीं होते। सामान्य कागजी नोटों की तुलना में इनकी लाइफ काफी ज्यादा होती है।

  1. नकली नोटों पर रोक

पॉलीमर शीट पर एडवांस सिक्योरिटी फीचर्स जोड़े जा सकते हैं, जिससे नकली नोट बनाना बेहद मुश्किल हो जाएगा।

  1. छपाई पर कम खर्च

कागजी नोट जल्दी खराब होने के कारण बार-बार नए नोट छापने पड़ते हैं। FY25 में RBI ने कागजी नोटों की छपाई पर 6,372.8 करोड़ रुपए खर्च किए थे। पॉलीमर नोट लंबे समय तक चलेंगे, इसलिए भविष्य में यह खर्च कम हो सकता है।

सवाल 2: क्या पुराने कागजी नोट बंद हो जाएंगे?

जवाब: नहीं। RBI और सरकार ने साफ किया है कि पॉलीमर नोट आने का मतलब यह नहीं है कि पुराने कागजी नोट बंद हो जाएंगे।

पॉलीमर और कागजी दोनों तरह के नोट साथ-साथ चलेंगे। बदलाव चरणबद्ध (Phase-wise) तरीके से होगा। जब तक नए नोट पूरी तरह स्थापित नहीं हो जाते, तब तक पुराने नोट सर्कुलेशन में बने रहेंगे।

सवाल 3: पॉलीमर नोट लाने का प्रस्ताव कब आया था?

जवाब: भारत में पॉलीमर नोटों पर पहली बार 2012 में काम शुरू हुआ था। उस समय नोटों की शेल्फ लाइफ बढ़ाने के उद्देश्य से यह योजना बनाई गई थी, लेकिन तकनीकी कारणों से प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ सका।

इसके बाद मई-जून 2026 में मीडिया रिपोर्ट्स और RBI की रिपोर्ट में फिर पॉलीमर नोटों पर चर्चा हुई। जून में RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने पुष्टि की थी कि इस प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है और इसके फायदे-नुकसान का मूल्यांकन किया जा रहा है।

सवाल 4: दुनिया के किन देशों में प्लास्टिक नोट चलते हैं?

जवाब: दुनिया के 60 से ज्यादा देशों में पॉलीमर बैंकनोट्स का इस्तेमाल किया जा रहा है। ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, यूनाइटेड किंगडम (UK) और न्यूजीलै में पॉलीमर नोट लंबे समय से सफलतापूर्वक चल रहे हैं।

सवाल 5: भारत में अब तक कब-कब बड़े नोट बंद किए गए?

पहली बार: जनवरी 1946

ब्रिटिश शासन के दौरान 500, 1000 और 10,000 रुपए के नोट बंद किए गए थे।

मकसद: काले धन और युद्धकाल में हुई अवैध कमाई पर रोक लगाना। बाद में 1954 में 1,000, 5,000 और 10,000 रुपए के नोट फिर जारी किए गए।

दूसरी बार: जनवरी 1978

मोरारजी देसाई सरकार ने 1,000, 5,000 और 10,000 रुपए के नोट बंद कर दिए।
मकसद: काले धन और भ्रष्टाचार पर रोक लगाना।

तीसरी बार: 8 नवंबर 2016

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रात 8 बजे देश में चल रहे 500 और 1,000 रुपए के नोट अमान्य घोषित कर दिए। इनकी जगह नया 500 रुपए का नोट और पहली बार 2,000 रुपए का नोट जारी किया गया।

2023 में 2,000 रुपए के नोट सर्कुलेशन से वापस लिए गए

19 मई 2023 को RBI ने क्लीन नोट पॉलिसी के तहत 2,000 रुपए के नोटों को सर्कुलेशन से वापस लेने का फैसला किया था। हालांकि इसे नोटबंदी नहीं कहा गया, क्योंकि लोगों को नोट बैंक में जमा करने या बदलने के लिए पर्याप्त समय दिया गया था।