PM Fasal Bima Yojana Scam: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के सूरतगढ़ से फर्जीवाड़े का बड़ा मामला सामने आया है। गांव कालूसर में एक ही खेत और एक ही फसल पर चार अलग-अलग बीमा पॉलिसियों के जरिए कुल 31 लाख 15 हजार 514 रुपये का क्लेम उठा लिया गया।

खास बात यह है कि एक ही खसरा नंबर पर सात बार आवेदन किए गए थे। इनमें चार आवेदन मंजूर हो गए। मामले के सामने आने के बाद कृषि विभाग ने किसानों के साथ CSC/e-मित्र संचालकों और बीमा कंपनी के कर्मचारियों की भूमिका की जांच के आदेश दिए हैं।

एक ही खेत पर 4 बार उठा लाखों का क्लेम

मामला सूरतगढ़ के गांव कालूसर का है। यहां खसरा नंबर 281/91 की जमीन किसान बनवारी लाल के नाम है। जमीन का कुल रकबा 10.37 हेक्टेयर यानी करीब 40 बीघा है। जुलाई 2025 में खरीफ सीजन के दौरान बनवारी लाल ने इस जमीन पर बोई गई मूंगफली की फसल का प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा कराया। इसके बाद इसी जमीन पर दो और बीमा आवेदन किए गए। एक आवेदन नजदीकी CSC यानी ई-मित्र संचालक विकास कुमार के जरिए 10.37 हेक्टेयर जमीन के लिए किया गया। तीसरा आवेदन दूसरे CSC संचालक बिजेश के माध्यम से 10.30 हेक्टेयर जमीन के लिए कराया गया। इन तीनों पॉलिसियों में मूंगफली की फसल का खराबा दिखाया गया और कुल 23 लाख 35 हजार 319 रुपये का क्लेम उठाया गया।

बटाईदार ने भी उसी जमीन पर कराया बीमा

मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। बनवारी लाल ने यही जमीन रिछपाल पुत्र गिरधारी को बटाई यानी लीज पर दे रखी थी। रिछपाल ने भी 15 जून 2025 को मूंगफली की बुवाई दिखाते हुए पूरी 10.37 हेक्टेयर जमीन का बतौर बटाईदार किसान बीमा करा लिया। फसल खराब होने का दावा करने के बाद रिछपाल के नाम से 7 लाख 80 हजार 195 रुपये का क्लेम लिया गया। इस तरह एक ही जमीन और एक ही फसल से जुड़ी चार अलग-अलग पॉलिसियों के जरिए कुल 31 लाख 15 हजार 514 रुपये का क्लेम खातों में पहुंच गया।

7 बार किए गए आवेदन, 4 हुए मंजूर

जांच में एक और अहम जानकारी सामने आई है। एक ही खसरा नंबर पर अलग-अलग CSC/e-मित्र केंद्रों के जरिए कुल 7 बार आवेदन किए गए थे। बताया गया कि बीमा कंपनी क्षेमा जनरल इंश्योरेंस ने सबसे पहले किए गए आवेदन को मंजूरी दी। इस पॉलिसी का क्लेम भी सबसे पहले पास हुआ और राशि किसान बनवारी लाल के खाते में पहुंची। इसके बाद उसी जमीन से जुड़े तीन और आवेदन किए गए। इनमें कुछ जानकारियां बदलकर आवेदन किया गया था। बीमा कंपनी की जांच में इन तीनों आवेदनों को रिजेक्ट कर दिया गया। लेकिन इसके बाद उसी जमीन पर तीन और आवेदन किए गए। इन आवेदनों पर समय पर आपत्ति या रिजेक्शन दर्ज नहीं हुआ। इसके बाद ये आवेदन आगे बढ़ते गए और ऑटो-अप्रूवल की प्रक्रिया के तहत मंजूर हो गए। इन तीन पॉलिसियों के क्लेम की राशि भी संबंधित खातों में पहुंच गई।

बीमा कंपनी की भूमिका पर उठे सवाल

मामले में अब बीमा कंपनी की प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में है। कृषि विभाग यह जांचना चाहता है कि एक ही खसरा नंबर, एक ही जमीन और एक ही फसल से जुड़े कई आवेदन सिस्टम में आने के बावजूद चार पॉलिसियां क्लेम तक कैसे पहुंचीं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन आवेदनों में पहले आपत्ति या रिजेक्शन सामने आया, उन्हीं से जुड़ी जमीन पर बाद में किए गए आवेदन कैसे आगे बढ़ गए। कृषि विभाग ने पॉलिसियों के चयन, जांच, स्वीकृति और अस्वीकृति की पूरी प्रक्रिया की जांच की मांग की है। साथ ही बीमा कंपनी के कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

राजस्थान में शुरू हुई पॉलिसी और क्लेम की जांच

श्रीगंगानगर का मामला सामने आने के बाद कृषि विभाग ने राजस्थान में ऐसे मामलों की जांच शुरू कर दी है। जांच में खसरा नंबर, जमीन का रकबा, किसान की पात्रता, फसल और एक ही जमीन पर बनी एक से ज्यादा पॉलिसियों का मिलान किया जा रहा है। यह भी देखा जा रहा है कि कहीं एक ही जमीन को अलग-अलग किसानों, बटाईदारों या CSC/e-मित्र संचालकों के जरिए दोबारा बीमित तो नहीं किया गया। इस जांच का उद्देश्य एक ही जमीन पर कई पॉलिसियां बनाकर फर्जी क्लेम लेने वाले मामलों की पहचान करना है।

टोंक और शाहपुरा में 5 किसानों पर FIR के निर्देश

फर्जी फसल बीमा क्लेम से जुड़े मामलों में कृषि विभाग ने टोंक और जयपुर जिले में भी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। खरीफ 2026 के दौरान टोंक जिले की मालपुरा तहसील और जयपुर जिले की शाहपुरा तहसील में इसी तरह के मामले सामने आए। इन मामलों में कृषि विभाग ने 5 किसानों के खिलाफ FIR दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। अब श्रीगंगानगर के मामले में भी किसानों के साथ CSC/e-मित्र संचालकों और बीमा कंपनी से जुड़े कर्मचारियों की भूमिका की जांच की जा रही है।

कृषि मंत्री ने कहा, दोषियों पर होगी कार्रवाई

मामले को लेकर कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा ने कहा कि फर्जी पॉलिसी बनाने, गलत तरीके से क्लेम लेने और इस पूरे नेटवर्क में सहयोग करने वालों की भूमिका की जांच की जाएगी। कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकारी सहायता का दुरुपयोग करने वालों के साथ किसी तरह की नरमी नहीं बरती जाएगी।

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