पटना। राजधानी के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल, पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (PMCH) में आउटसोर्सिंग कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल का असर अब गंभीर रूप ले चुका है। लगातार दूसरे दिन भी लगभग 350 कर्मियों के काम बंद रखने से अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। इमरजेंसी से लेकर जनरल वार्ड तक में मरीजों को बुनियादी सुविधाएं भी नसीब नहीं हो पा रही हैं।

​बेहाल मरीज और परिजनों की मुसीबत

​हड़ताल के कारण सबसे अधिक परेशानी उन मरीजों को हो रही है जो गंभीर स्थिति में भर्ती हैं। कई वार्डों में स्थिति यह है कि बेड पर बिछाने के लिए चादर तक उपलब्ध नहीं है। मजबूरन परिजनों को अस्पताल के बाहर से चादरें खरीदनी पड़ रही हैं। आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थियों के लिए भी संकट खड़ा हो गया है। दस्तावेजों के सत्यापन और दवाओं के वितरण में तैनात कर्मियों के न होने से फाइलें ठप पड़ी हैं। डिप्टी सुपरिटेंडेंट कार्यालय से हस्ताक्षर नहीं मिलने के कारण नए मरीजों को नि:शुल्क दवाएं नहीं मिल पा रही हैं, जिससे इलाज की प्रक्रिया बाधित हो गई है।

​वेतन के लिए तरसे कर्मचारी, मानदेय में भी कटौती

​हड़ताली कर्मियों का आरोप है कि उन्हें पिछले छह महीनों से वेतन का भुगतान नहीं किया गया है। इसके अलावा, श्रम कानूनों का उल्लंघन करते हुए उन्हें निर्धारित 11 हजार रुपये प्रतिमाह के स्थान पर मात्र 8 हजार रुपये ही दिए जा रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने बार-बार संबंधित एजेंसी और अस्पताल प्रशासन से गुहार लगाई, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला। इसी उपेक्षापूर्ण रवैये के कारण उन्हें हड़ताल का रास्ता चुनना पड़ा।

​गंगा पाथवे पर धरना और प्रशासन की विफलता

​अस्पताल परिसर से हटाए जाने के बाद अब कर्मियों ने गंगा पाथवे पर अपना मोर्चा संभाल लिया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों के साथ वार्ता की। उन्होंने फ्रंट लाइन मैनपावर एजेंसी को भुगतान सुनिश्चित कराने का भरोसा दिया। हालांकि कर्मचारी अब मौखिक आश्वासन से संतुष्ट नहीं हैं। उनका स्पष्ट कहना है कि जब तक कंपनी का कोई अधिकृत प्रतिनिधि आकर लिखित में भुगतान का ठोस आश्वासन नहीं देता तब तक हड़ताल जारी रहेगी। फिलहाल अस्पताल प्रशासन और कर्मियों के बीच गतिरोध बरकरार है जिसका खामियाजा सीधे तौर पर मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।