हेमंत शर्मा, इंदौर। दो दिन तक खजराना पुलिस पुलिस शहरभर में दबिश देने के दावे करती रही। अलग-अलग इलाकों में छापेमारी की बातें सामने आती रहीं। लेकिन जिस गैंगस्टर को पकड़ने के लिए पूरा महकमा सक्रिय होने का दावा कर रहा था, वही बदमाश खुद थाने पहुंच गया। बदमाश सतीश भाऊ को पुलिस ढूंढती रह गई और उसने सीधे थाने में जाकर सरेंडर कर दिया।
शिवाजी जयंती में शामिल होने की तैयारी, पहले थाने में हाजिरी!
सूत्रों के मुताबिक, सतीश भाऊ शिवाजी जयंती के कार्यक्रम में शामिल होना चाहता था। किसी तरह की गिरफ्तारी या रास्ते में रोके जाने की कार्रवाई से बचने के लिए उसने खुद ही थाने पहुंचकर सरेंडर करना बेहतर समझा। यानी जिसे पकड़ने के लिए पुलिस “तलाश अभियान” चला रही थी, उसने खुद आकर पूरी कहानी पलट दी। क्या कोई पुलिस ने बदमाश से सेटिंग कर ली थी । जिले कारण पुलिस उसे पकड़ नहीं पा रही थी।
दबिश के दावे बनाम हकीकत
दो दिनों तक पुलिस की ओर से लगातार यह कहा जाता रहा कि आरोपी की तलाश में अलग-अलग जगह दबिश दी जा रही है। लेकिन जब आरोपी खुद थाने पहुंच गया, तो सवाल खड़े हो गए—क्या पुलिस सच में उसके करीब पहुंची थी? या फिर पूरा अभियान सिर्फ कागजों तक सीमित था? या ये कोई सेटिंग का बड़ा खेल था या कोई राजनीतिका दबाव पुलिस पर था।
थाने में जमीन पर बैठाकर माफीनामा, वीडियो भी बनाया
थाने पहुंचने के बाद सतीश भाऊ को जमीन पर बिठाकर माफीनामा लिखवाया गया। इतना ही नहीं, इसका वीडियो भी बनवाया गया। यह वीडियो अब चर्चा का विषय बना हुआ है। कुछ लोग इसे पुलिस की सख्ती बता रहे हैं, तो कुछ इसे “इमेज मैनेजमेंट” की कार्रवाई कह रहे हैं।
खजराना गणेश मंदिर के गर्भगृह में हंगामे के बाद बढ़ा था विवाद
पूरे मामले की शुरुआत तब हुई थी जब सतीश भाऊ ने शहर के प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर के गर्भगृह में पहुंचकर दर्शन किए थे। मंदिर जैसे संवेदनशील स्थल पर इस तरह की हरकत ने सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए थे। इसके बाद पुलिस उसकी तलाश में जुटी होने का दावा कर रही थी।

