लवकुश बैरागी, आगर मालवा। मध्यप्रदेश के आगर मालवा जिले में सियासी घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। गुरुवार को जहां भारतीय जनता पार्टी (BJP) की अंदरूनी खींचतान खुलकर सड़क पर आई थी, वहीं अब कांग्रेस भी भीषण गुटबाजी और कलह के आरोपों से घिर गई है। सुसनेर से कांग्रेस विधायक भेरू सिंह परिहार ने अपनी ही पार्टी के बड़े नेताओं के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए एक बड़ा राजनीतिक विस्फोट कर दिया है। विधायक ने यहां तक आरोप लगा दिया कि मध्य प्रदेश के कुछ बड़े नेता खुद ही सूबे में कांग्रेस की सरकार बनते नहीं देखना चाहते।
पूर्व मंत्री अजय सिंह के दौरे से भड़का विवाद
इस पूरे विवाद की मुख्य वजह पूर्व मंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता अजय सिंह (राहुल भैया) का आगर मालवा दौरा बना। विधायक भेरूसिंह परिहार का आरोप है कि जिले के विधायक होने के बावजूद उन्हें राहुल भैया के इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम की कोई आधिकारिक सूचना तक नहीं दी गई। विधायक ने कहा, “मैंने खुद फोन पर राहुल भैया से बात करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने मुझसे मिलने तक से इनकार कर दिया। संगठन में लगातार मेरी उपेक्षा की जा रही है। कुछ वरिष्ठ नेता पार्टी को मजबूत करने के बजाय उसे अंदर से कमजोर करने का काम कर रहे हैं।” नाराज विधायक ने आलाकमान को खुली चेतावनी देते हुए कहा कि यदि पार्टी के भीतर यही हालात रहे और कार्यकर्ताओं व जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा बंद नहीं हुई, तो वे पार्टी छोड़ने पर भी गंभीर विचार कर सकते हैं।
अजय सिंह का पलटवार- ‘ऐसी बातों को तवज्जो नहीं देता’
दूसरी तरफ, इन गंभीर आरोपों पर पूर्व मंत्री अजय सिंह ने नरमी दिखाने के बजाय तीखा पलटवार किया है। उन्होंने विधायक के आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा, “फोन पर मेरी विधायक से बात जरूर हुई थी और मैंने उन्हें कांग्रेस के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आमंत्रित भी किया था। लेकिन जो व्यक्ति सार्वजनिक रूप से इस तरह की बातें कर रहा है, मैं उस पर कोई टिप्पणी करना नहीं चाहता और न ही ऐसी बातों को कोई तवज्जो देता हूँ।”
बंद कमरे में सुलझाएं विवाद, अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं
कांग्रेस के भीतर मचे इस घमासान पर जिला कांग्रेस अध्यक्ष विजयलक्ष्मी तंवर ने डैमेज कंट्रोल की कोशिश की है। उन्होंने विधायक परिहार की बयानबाजी पर असहमति जताते हुए कहा, “कांग्रेस एक अनुशासित संगठन है। यदि पार्टी के भीतर किसी भी नेता या विधायक को कोई शिकायत है, तो उसे मीडिया के सामने सार्वजनिक करने के बजाय पार्टी के आंतरिक मंच पर या बंद कमरे में उठाना चाहिए। सभी मुद्दों का समाधान संगठन की तय प्रक्रिया के तहत ही किया जाएगा।”
मालवा अंचल में कांग्रेस को बड़ा झटका
आगर मालवा में एक ही हफ्ते के भीतर पहले भाजपा और अब कांग्रेस के भीतर मचे इस घमासान ने आगामी राजनीतिक समीकरणों को गरमा दिया है। देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस आलाकमान अपने इस बागी विधायक को मनाने में कामयाब होता है या फिर मालवा अंचल में कांग्रेस को कोई बड़ा झटका लगने वाला है।
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