दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है। यह तस्वीर अभिनेता राकेश बेदी (Rakesh Bedi) के साथ हुई एक मुलाकात की बताई जा रही है। तस्वीर में मुख्यमंत्री जिस कुर्सी पर बैठी नजर आ रही हैं, उसे लेकर सोशल मीडिया (Social Media) पर बहस शुरू हो गई है। कई यूजर्स ने दावा किया है कि यह रेड ओक (Red Oak) कंपनी की ‘इम्पीरियो’ एग्जीक्यूटिव चेयर (‘Imperio’ Executive Chair) है। इस मुद्दे को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) ने भी दिल्ली सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी ने तस्वीर साझा करते हुए सवाल किया कि आखिर इस कुर्सी की कीमत कितनी है। सोशल मीडिया पर भी लोग इस कथित महंगी कुर्सी को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
कुछ यूजर्स इसे सरकारी खर्च से जोड़कर सवाल उठा रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे सामान्य कार्यालय फर्नीचर बता रहे हैं। तस्वीर सामने आने के बाद भाजपा और आम आदमी पार्टी समर्थकों के बीच सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। दावा किया जा रहा है कि तस्वीर में दिखाई दे रही कुर्सी Red Oak कंपनी की ‘Imperio’ एग्जीक्यूटिव चेयर है, जिसकी कीमत करीब 66 हजार रुपये से लेकर 82,600 रुपये तक हो सकती है। सोशल मीडिया पर वायरल दावों के मुताबिक इस हाई-एंड एग्जीक्यूटिव चेयर में कई प्रीमियम सुविधाएं मौजूद हैं, जिनमें इलेक्ट्रॉनिक मसाज फीचर ,पीछे झुकने (रिक्लाइन) की सुविधा ,ऑटोमैटिक फुटरेस्ट ,फोम कुशन ,लेदर अपहोल्स्ट्री जैसे फीचर्स शामिल बताए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने यह तस्वीर 25 मई को अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा की थी। तस्वीर वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर बहस शुरू हो गई। कई यूजर्स ने सवाल उठाए कि राजधानी में जनता से जुड़ी कई समस्याएं मौजूद हैं, ऐसे समय में महंगी कुर्सी की तस्वीर गलत संदेश दे सकती है। कुछ लोगों ने यह भी पूछा कि क्या यह कुर्सी सरकारी धन से खरीदी गई है या निजी इस्तेमाल की है।
भाजपा और AAP के दावे
एक ओर जहां विपक्षी दल और कुछ यूजर्स कुर्सी की कीमत को लेकर सवाल उठा रहे हैं, वहीं भाजपा समर्थक और कई सोशल मीडिया यूजर्स मुख्यमंत्री के समर्थन में उतर आए हैं। सोशल मीडिया पर समर्थकों ने इस विवाद की तुलना पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) के सरकारी आवास के रेनोवेशन विवाद से की है। एक यूजर ने X पर लिखा, “रेखा गुप्ता जी देश की राजधानी दिल्ली की मुख्यमंत्री हैं। क्या वे 60 हजार रुपये की कुर्सी पर भी नहीं बैठ सकतीं? आजकल एक सामान्य विधायक भी लाखों रुपये के जूते पहनता है और यहां बात मुख्यमंत्री की कुर्सी की हो रही है।”
केजरीवाल के शीशमहल से तुलना
सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ यूजर्स ने अरविंद केजरीवाल के कथित ‘शीशमहल’ विवाद का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का बचाव किया। एक पोस्ट में लिखा गया, “सिर्फ 66 हजार की कुर्सी और ये लोग केजरीवाल के शीशमहल को लेकर आरोप लगाते हैं।” वहीं, एक अन्य यूजर ने मजाकिया अंदाज में टिप्पणी की, “केजरीवाल के शीशमहल के टॉयलेट सीट की कीमत में ऐसी 50 कुर्सियां आ जाएंगी।” कुछ लोगों ने इस बहस के जरिए राजनीति पर भी सवाल उठाए। एक टिप्पणी में कहा गया, “ये दोनों पार्टियां जनता के सामने लड़ती हैं, लेकिन अंदर से एक जैसी हैं।” वहीं कुछ यूजर्स ने तंज कसते हुए लिखा, “अच्छी कुर्सी है, टैक्स के पैसे का बढ़िया इस्तेमाल।” सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर समर्थन, आलोचना और व्यंग्य तीनों तरह की प्रतिक्रियाएं लगातार देखने को मिल रही हैं।
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