राजकुमार पाण्डेय की कलम से
नेताजी के बदले ‘देवता’
राजनैतिक नियुक्तियों की सूची में जगह फिक्स करने के लिए प्रदेश के एक नेताजी ब्रम्हा, विष्णु, महेश यानी निर्णायकों के खूब चक्कर काट रहे थे. उम्मीद थी कि नया साल लगते ही उनकी किस्मत भी चमक जाएगी, लेकिन ऐसा हो नहीं सका. अब राष्ट्रीय समीकरण फिर बदले तो नेताजी ने एक निर्णायककर्ता से किनारा कर नए निर्णायककर्ता से समीकरण साधना शुरू कर दिए हैं. नेताजी को उम्मीद है कि इस बदलाव से उनकी किस्मत का सितारा एक बार फिर चमककर ही रहेगा.
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‘गौभक्त’ नेताजी की तलाश
भोपाल गौकशी मामले में जांच इतनी रफ्तार से चली कि अब तक पुलिस यह तक पता नहीं लगा पाई है कि स्लाटर हाउस तक गायें पहुंची कैसे. खबर है कि इसके पीछे का कारण गौभक्त नेताजी का हाथ बताया जा रहा है. जांच दल पूरे मामले में कार्रवाई तो कर रहा है, लेकिन असली मुलजिम तक पहुंचने में कठिनाई महसूस हो रही है. यही कारण है कि जांच की रफ्तार में ऐसी चाबी भरी गई है कि जांच भी चलती रही और असली मुलजिमों का बाल भी बांका न हो.
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उत्तरायण होने को कोई नेता तैयार नहीं
भगवान सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण हो गए. इस बीच एक कार्यक्रम में बीजेपी नेताओं की जमावट हुई तो भोपाल उत्तर विधानसभा का जिक्र छिड़ गया. सबने एक-दूसरे से पूछा कि 2028 में कौन दावेदारी करेगा. सबके सब नेता एक-दूसरे को निहारते रहे. किसी भी ने ठोक कर नहीं कहा कि उत्तर विधानसभा से चुनाव लड़ने के लिए वह आगे आएगा. संक्रांति पखवाड़ा चल ही रहा था कि एक वरिष्ठ कार्यकर्ता बोल बैठा 2028 में उत्तरायण होने को कोई तैयार नहीं है.

