राजकुमार पाण्डेय की कलम से

चिड़िया बैठाने चुनावी डयूटी छोड़कर आए साहब

दूसरे प्रदेशों में चल रहे चुनावों में मध्य प्रदेश के आला अफसरों की भी डयूटी लगी है. डयूटी के बीच अचानक से एक आईएएस अफसर का वापस आना हुआ और कारण रहा फाइलों पर चिड़िया बैठाना. साहब आए और चिड़िया बैठाने वाले दिन ही वापस निकल गए. साहब का अचानक से आना और वापस जाना चर्चा का विषय बन गया. बड़ी बात ये रही कि चुनावी डयूटी के बीच जिन अफसर को प्रभार मिला, उन्हें तक साहब के आने की जानकारी बाद में लग सकी.

लिस्ट देख ली है, नाम है

मध्य प्रदेश में जल्द ही सरकारी पदों पर राजनैतिक नियुक्तियों की सूची आने वाली है. दौड़ में शामिल एक नेताजी इस बात को लेकर फूला नहीं समां रहे हैं. ग्वालियर-चंबल इलाके से आने वाले नेताजी समर्थकों को यह बता-बताकर बेहद खुश हैं कि उन्होंने अपनी आंखों से लिस्ट में खुद का नाम देख लिया है. देरी है तो बस सूची जारी होने की. हालांकि बात जब दूर तक फैली तो नेताजी को अब यह डर भी सता रहा है कि सूची वाली बात पब्लिक डोमेन में आने से कहीं ऐन मौके पर पत्ता न कट जाए.

एलिवेटेड रोड हादसाः निगरानी हुई फेल या कुछ और खेल!

ग्वालियर के एलिवेटेड रोड का प्रोजेक्ट जो सबसे प्राथमिकता वाले प्रोजेक्ट में शामिल है, उसमें गर्डर गिरकर टूटने की घटना से फिलहाल तो हलचल है.खुद मंत्री से लेकर अफसर इस मामले में अब पैनी निगाह बनाए हुए हैं, लेकिन सवाल यह है कि जिस प्रोजेक्ट को लेकर शहर के बड़े नेताजी उस पर दौड़ लगाए थे, अब हादसे के बाद दूर खिड़की से इशारा कर ग्वालियर आने से पहले ही तीखी कार्रवाईयां करवा रहे है. बड़ी बात ये है कि यह कार्रवाई भी सिर्फ प्रोजेक्ट के आसपास वालों पर दिखाई दी है. असल में लापरवाही का जिन्न तो बड़ों का ही रगड़ा हुआ है. शुरुआत की जांच में तो यह मशीन की खामी बताई जा रही है, लेकिन मामला इतना सीधा-साधा नहीं है. इस पूरे मामले की तकनीकी जांच का दावा जरूर किया गया है. बड़ा प्रोजेक्ट है इसलिए इसकी निगरानी भी उतनी ही बड़े स्तर पर होना जरूरी है. शहर के ट्रैफिक को नई सांस देने के मकसद से तैयार किया जा रहा एलिवेटेड रोड का प्रोजेक्ट का काम अभी लंबा चलना है. ऐसे में शहर के बड़े नेताजी अपनी किरकिरी बचाने के लिए जांच के जिन्न को प्याले में कैद कर सकते हैं. अपने करीबी नुमाइंदों को जांच रूपी जिन्न की निगरानी की जिम्मेदारी दे दी गई है. कारण ये है कि इस एक गर्डर गिरने के हादसे ने सियासी कान खड़े कर दिए हैं. आगे का काम महत्वपूर्ण है सो भला कार्रवाई का तड़का लगातार काम को आगे दौड़ाने की प्लानिंग जो चल रही है.

मध्य प्रदेश कांग्रेस में ‘काफी’ पॉलिटिक्स

मध्य प्रदेश कांग्रेस नेताओं का कॉफी प्रेम किसी से छुपा नहीं है. प्रदेश प्रभारी को एक खास जगह की कॉफी पसंद है. पिछले तीन दिन से लगातार कांग्रेस में बैठक के चल रही थी. शनिवार शाम कांग्रेस के बड़े नेताओं की एक गोपनीय मीटिंग हुई. इस मीटिंग में शामिल होने के लिए विंध्य के दिग्गज नेता भी पहुंचे.  उनके पहुंचते ही मध्य प्रदेश कांग्रेस के कप्तान भी भागते हुए उनके पास पहुंचे और उन्हें जबरदस्ती कॉफी पिलाने ले गए. कॉफी पीने तो दोनों नेता साथ गए थे लेकिन मीटिंग में लौटकर सिर्फ कप्तान आए. विंध्य के बड़े नेता कॉफी हाउस से ही रवाना हो गए. अब नेता और कार्यकर्ता पता लग रहे हैं कि ऐसी कौन सी कॉफी पर चर्चा हुई जिसके बाद नेताजी मीटिंग में वापस नहीं लौटे. 

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