सोहराब आलम/​मोतिहारी (पूर्वी चंपारण): बिहार सरकार के ग्रामीण विकास मंत्री और पूर्वी चंपारण के प्रभारी मंत्री श्रवण कुमार ने महात्मा गांधी की कर्मभूमि चंपारण के सर्वांगीण विकास के लिए एक नई कार्ययोजना के संकेत दिए हैं। मोतिहारी में आयोजित जिला स्तरीय बीस सूत्री कार्यान्वयन समिति की बैठक में शिरकत करने पहुंचे मंत्री ने स्पष्ट किया कि बापू की विरासत को संजोना और उसे पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाना सरकार की प्राथमिकता है।

​गांधी सर्किट का होगा कायाकल्प

बैठक के दौरान प्रभारी मंत्री ने कहा कि पूर्वी चंपारण का इतिहास पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा है। महात्मा गांधी के सत्याग्रह का केंद्र रहने के कारण, इस जिले का सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व अद्वितीय है। मंत्री ने जिले के अधिकारियों को निर्देशित किया कि गांधी जी से जुड़े जितने भी ऐतिहासिक स्थल हैं, उन्हें चिह्नित कर उनके विकास के लिए एक ठोस ‘रोड मैप’ तैयार किया जाए। उन्होंने कहा, यह केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि बापू के प्रति हमारी श्रद्धा है। इन स्थलों को इस तरह विकसित किया जाएगा कि वे आने वाली पीढ़ियों के लिए ज्ञान और प्रेरणा के स्रोत बने रहें।

​बाढ़ पूर्व तैयारी पर अधिकारियों को दी चेतावनी

बैठक में केवल विकास कार्यों की समीक्षा ही नहीं हुई, बल्कि मानसून से पहले की तैयारियों पर भी गंभीरता से चर्चा की गई। उत्तर बिहार में बाढ़ की विभीषिका को देखते हुए मंत्री श्रवण कुमार ने स्पष्ट किया कि प्रशासन को किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद रहना होगा। उन्होंने कहा कि बाढ़ पूर्व तैयारियों के संबंध में सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं और उन्हें ‘पाइपलाइन’ में चल रहे कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का सख्त निर्देश दिया गया है।

​जवाबदेही और पारदर्शी प्रशासन का वादा

मंत्री श्रवण कुमार ने बैठक में जोर देकर कहा कि सरकार का लक्ष्य अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना है। उन्होंने उपस्थित जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से समन्वय बनाकर काम करने का आह्वान किया। साथ ही, जिला प्रशासन को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि जन-कल्याणकारी योजनाओं में किसी भी स्तर पर कोताही न बरती जाए। मंत्री के इस दौरे से जिले में विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है, साथ ही ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण की दिशा में भी एक सकारात्मक पहल की शुरुआत मानी जा रही है।