Prahlad Gunjal Case: कोटा-बूंदी संसदीय क्षेत्र से लोकसभा चुनाव लड़ चुके कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक प्रहलाद गुंजल के खिलाफ पंचायती राज चुनाव की आचार संहिता के उल्लंघन और कथित धमकी देने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया है। मामला 21 अक्टूबर को कोलाना गांव स्थित देवनारायण मंदिर में हुई एक सभा से जुड़ा है।

पुलिस के अनुसार, सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में गुंजल राजीव दत्ता के खिलाफ बयान देते नजर आए। वहीं, गुंजल ने सभा को चुनावी सभा मानने से इनकार किया है और पुलिस पर दबाव में कार्रवाई करने का आरोप लगाया है।

पुलिसकर्मी की शिकायत पर दर्ज हुआ मुकदमा

रानपुर थाने के खुफिया विभाग में तैनात कॉन्स्टेबल पुष्पेंद्र चौधरी ने यह मुकदमा दर्ज करवाया है। उनके मुताबिक, सूचनाएं जुटाने के दौरान उन्हें 21 अक्टूबर की शाम का एक वीडियो मिला। वीडियो में कोलाना गांव के देवनारायण मंदिर में आम सभा आयोजित होने और प्रहलाद गुंजल के लोगों को संबोधित करने की बात सामने आई।

शिकायत के अनुसार, गुंजल ने सभा में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के सहायक के रूप में काम कर रहे सेवानिवृत्त आरपीएस अधिकारी राजीव दत्ता के खिलाफ बयानबाजी की। उन पर धमकी भरे लहजे में बात करने और लोगों को उकसाने का भी आरोप है। पुलिस ने सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो के आधार पर मामला दर्ज किया है।

जांच अधिकारी बदले गए

मामले की जांच पहले असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर भरत राज मीणा को सौंपी गई थी। बाद में इसकी जिम्मेदारी अनंतपुरा थानाधिकारी महेश कारवाल को दे दी गई। फिलहाल, प्रकरण में लगाए गए आरोपों की जांच की जा रही है।

गुंजल बोले- मुकदमे दर्ज होने से डरने वाला नहीं

मुकदमा दर्ज होने के बाद प्रहलाद गुंजल ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, मेरे ऊपर भले ही रोज एक मुकदमा दर्ज कर लिया जाए, तब भी मैं डरने वाला नहीं हूं। गुंजल ने आरोप लगाया कि पुलिस राजीव दत्ता के इशारे और दबाव में कार्रवाई कर रही है। उनके मुताबिक, कोलाना में कोई चुनावी सभा नहीं हुई थी। उन्होंने दावा किया कि वहां न तो माइक या लाउडस्पीकर का इस्तेमाल किया गया और न ही किसी मंच से भाषण दिया गया। गुंजल ने इसे लोगों के साथ एक आंतरिक बैठक बताया।

राजीव दत्ता को लेकर दिए बयान पर भी गुंजल का पक्ष

गुंजल ने स्वीकार किया कि उन्होंने राजीव दत्ता को लेकर तीखी टिप्पणी की थी। उनके मुताबिक, उन्होंने कहा था कि सरकार बदलने पर वह राजीव दत्ता की हालत बिगाड़ देंगे और उन्हें ऐसी स्थिति में पहुंचा देंगे कि वह आत्महत्या करने या बंदूक उठाकर अपराधी बनने के बारे में सोचने लगें। गुंजल ने अपने बयान के समर्थन में प्रशासनिक अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों के रवैये पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि आम लोगों को परेशान किया जा रहा है और सोशल मीडिया पर सामान्य पोस्ट लिखने पर भी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

निजी परिसर में बैठक होने का दावा

पूर्व विधायक ने कहा कि बैठक एक निजी परिसर में हुई थी और वहां कोई सरकारी कर्मचारी मौजूद नहीं था। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि ऐसे मामले में सरकारी कार्य में बाधा डालने का आरोप कैसे लगाया जा सकता है। राजीव दत्ता की नियुक्ति की प्रकृति को लेकर भी गुंजल ने अपनी बात रखी। फिलहाल, मामले में पुलिस की शिकायत और गुंजल के दावों के बीच मतभेद सामने आए हैं। पुलिस ने वीडियो के आधार पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की है, जबकि गुंजल ने आरोपों को गलत बताते हुए कार्रवाई को दबाव से प्रेरित बताया है।

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