पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना से जुड़े यौन उत्पीड़न मामले में बेंगलुरु की विशेष अदालत ने अहम निर्देश जारी किए हैं। मामले की एक 43 वर्षीय सामाजिक कार्यकर्ता और अभियोजन पक्ष की गवाह ने अदालत में दावा किया कि गवाही के बाद उन्हें धमकी भरे फोन कॉल मिले। कोर्ट ने आरोपों को गंभीरता से लेते हुए विशेष जांच दल (SIT) को मामले की जांच करने और गवाह को आवश्यक सुरक्षा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।

गवाह ने कोर्ट में क्या कहा?

‘बार एंड बेंच’ की रिपोर्ट के अनुसार, गवाह ने 20 अगस्त 2026 को अपनी जिरह के दौरान अदालत को बताया कि मुख्य परीक्षण के बाद उन्हें फोन पर धमकियां मिलीं। उनका मुख्य परीक्षण 6 जुलाई 2026 को हुआ था।

गवाह ने यह भी कहा कि यदि उनके या उनके बेटे के साथ कोई अप्रिय घटना होती है, तो इसके लिए प्रज्वल रेवन्ना को जिम्मेदार ठहराया जाए। अदालत ने इन आरोपों को गंभीरता से लेते हुए SIT को जांच के निर्देश दिए हैं।

SIT को अगली सुनवाई तक रिपोर्ट देने का आदेश

सेशन कोर्ट के जज शिवप्रसाद केबी ने SIT प्रमुख और एडीजीपी को भेजे संचार में मामले की जांच करने तथा कानून के मुताबिक गवाह को सुरक्षा देने को कहा है। अदालत ने SIT से अगली सुनवाई तक विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का भी निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 2 सितंबर 2026 को होगी।

प्रज्वल रेवन्ना पर क्या है मामला?

प्रज्वल रेवन्ना 2019 से 2024 तक कर्नाटक के हसन से लोकसभा सांसद रहे। मई 2024 में उन्हें कई यौन उत्पीड़न मामलों में गिरफ्तार किया गया था। अगस्त 2025 में एक दुष्कर्म मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। वर्तमान मामले में एक घरेलू सहायिका के यौन उत्पीड़न का आरोप है।

SIT ने इस मामले में 100 से अधिक गवाहों को सूचीबद्ध किया है और फिलहाल अभियोजन पक्ष के साक्ष्य दर्ज किए जा रहे हैं। पीडब्ल्यू-4 इस मामले में गवाही देने वाली चौथी गवाह हैं।

जेल से मोबाइल मिलने पर भी उठे सवाल

इस बीच, हाल ही में CCB ने परप्पना अग्रहारा जेल में प्रज्वल रेवन्ना की बैरक से कथित तौर पर एक मोबाइल फोन, चार्जर, पेन ड्राइव और नोट्स वाली डायरी बरामद की थी। इस बरामदगी के बाद जेल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे हैं।

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