दिलशाद अहमद, सूरजपुर। सूरजपुर जिला चिकित्सालय के मातृत्व एवं शिशु अस्पताल से एक बेहद दुखद मामला सामने आया है। यहां मंगलवार को प्रसव से पहले इंजेक्शन लगाए जाने के बाद एक गर्भवती महिला और उसके गर्भ में पल रहे नवजात की मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों ने डॉक्टर पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

इस मामले को लेकर विपक्षी पार्टी भी सक्रिय हो गई है। क्षेत्र के कांग्रेस नेता पंकज तिवारी ने बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं के साथ CMHO कार्यालय का घेराव कर निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की। वहीं मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए CMHO डॉ. के.डी. पैकरा ने पांच सदस्यीय जांच समिति का गठन कर दिया है। यह समिति पूरे घटनाक्रम की जांच कर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके आधार पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

पति ने लगाया लापरवाही का आरोप
गर्भवती मृतका के पति सूरज मानिकपुरी ने आरोप लगाया है कि अस्पताल की डॉक्टर गरिमा की घोर लापरवाही के कारण उनकी पत्नी और अजन्मे बच्चे की मौत हुई है। पीड़ित परिवार अब संबंधित डॉक्टर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहा है।
डॉक्टर ने स्वीकार की तबीयत बिगड़ने की बात
इस पूरे मामले में आरोपों के घेरे में आईं डॉ. गरिमा ने भी इस बात को स्वीकार किया है कि मरीज को इंजेक्शन लगाने के बाद अचानक उसकी स्थिति बिगड़ने लगी थी। डॉक्टर के अनुसार, इंजेक्शन देने के बाद मरीज की तबीयत में अप्रत्याशित गिरावट आई और तमाम कोशिशों के बावजूद जच्चा और बच्चा दोनों की जान नहीं बचाई जा सकी।
कलेक्टर ने गठित की पोस्टमार्टम के लिए डॉक्टरों की टीम
वहीं घटना के बाद मृतका के परिजन सूरजपुर कलेक्टर रेना जमील से मिलने पहुंचे और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। इसके बाद कलेक्टर रेना जमील ने पोस्टमार्टम के लिए तीन डॉक्टरों की टीम गठित की है। यह टीम पोस्टमार्टम करेगी और बिसरा भी जब्त करेगी, ताकि किसी प्रकार की शंका होने पर बिसरा रिपोर्ट भेज कर उसकी भी जांच कराई जा सके।

CMHO ने बनाई विशेष जांच समिति (गर्भवती और अजन्मे शिशु की मौत)
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग भी हरकत में आ गया है। जिला अस्पताल सूरजपुर के सीएमएचओ डॉ. के.डी. पैकरा ने मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय विशेष जांच टीम का गठन किया है। यह टीम पूरे घटनाक्रम और उपचार संबंधी दस्तावेजों की जांच कर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगी। सीएमएचओ के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच दल की रिपोर्ट के आधार पर जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी के अनुसार दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

बहरहाल, इस दुखद घटना ने सरकारी अस्पतालों की स्वास्थ्य व्यवस्था और डॉक्टरों की संवेदनशीलता को एक बार फिर कटघरे में खड़ा कर दिया है। गरीब मरीजों को निजी क्लीनिकों में भेजने का खेल और इलाज में लापरवाही की शिकायतें नई नहीं हैं, लेकिन जब यह लापरवाही किसी की जान ले ले, तो व्यवस्था पर से जनता का भरोसा उठने लगता है। अब देखना होगा कि पांच सदस्यीय जांच टीम की यह कार्रवाई पीड़ित परिवार को कब तक और कितना इंसाफ दिला पाती है, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
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