दिल्ली में अनाधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले लाखों लोगों के लिए राहत की खबर सामने आई है। राजधानी की कुल 1,511 अनाधिकृत कॉलोनियों के नियमितीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। इस दिशा में दिल्ली नगर निगम (MCD) एक नया डिजिटल सिस्टम तैयार कर रहा है। इसके तहत ‘SWAGAM’ पोर्टल की डेमो टेस्टिंग चल रही है, जिसे जल्द ही सरकार के मुख्य ऑनलाइन पोर्टल से इंटीग्रेट किया जाएगा। यह पोर्टल पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाने में मदद करेगा, जिससे कॉलोनियों के दस्तावेज़, सत्यापन और अन्य औपचारिकताओं को एक ही प्लेटफॉर्म पर प्रबंधित किया जा सकेगा। अधिकारियों के अनुसार, इससे नियमितीकरण की प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी और तेज़ होने की उम्मीद है।

दिल्ली नगर निगम द्वारा चलाए जा रहे इस प्रोजेक्ट के तहत चिन्हित कॉलोनियों में 50% से अधिक ड्रोन सर्वेक्षण पूरा किया जा चुका है। इन सर्वेक्षणों के जरिए कॉलोनियों का डिजिटल नक्शा, सड़क नेटवर्क और संपत्तियों की सीमाओं से जुड़ा डेटा तैयार किया जा रहा है। यह पूरा डेटा आगे ‘SWAGAM’ पोर्टल में जोड़ा जाएगा, जिससे लोगों को अपनी संपत्तियों के नियमितीकरण के लिए आवेदन करने में आसानी होगी। अधिकारियों के मुताबिक, इस सिस्टम का उद्देश्य प्रक्रिया को पारदर्शी और तेज बनाना है। खास बात यह है कि इस पोर्टल को आम नागरिकों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है। इसमें बैंकिंग मोबाइल ऐप की तरह आसान और सरल भाषा का इस्तेमाल किया गया है, ताकि तकनीकी जानकारी कम होने पर भी लोग इसे आसानी से इस्तेमाल कर सकें।

फिलहाल पोर्टल को लिंक करना बाकी

दिल्ली नगर निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, ‘SWAGAM’ पोर्टल को मुख्य सरकारी सिस्टम से जोड़ने का काम फिलहाल चल रहा है। हाल ही में इसका डेमो भी किया गया, जिसमें भाषा को और सरल बनाने पर विशेष जोर दिया गया ताकि आम नागरिक आवेदन प्रक्रिया, अपने क्षेत्र की स्थिति और नियमों को आसानी से समझ सकें। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि नियमितीकरण प्रक्रिया केवल आवेदन तक सीमित नहीं होगी, बल्कि इसमें कई तरह के शुल्क और नियम लागू होंगे। मास्टर प्लान के अनुसार, यदि किसी संपत्ति में फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) से अधिक निर्माण पाया जाता है, तो उस पर सामान्य अतिरिक्त शुल्क की तुलना में तीन गुना अधिक जुर्माना लगाया जाएगा।

इसके अलावा, नियमितीकरण के लिए कोई एक समान शुल्क तय नहीं किया गया है। इसमें आवेदन शुल्क, जांच शुल्क और अन्य प्रशासनिक शुल्क शामिल होंगे। उदाहरण के तौर पर, जांच शुल्क 10 रुपये प्रति वर्ग मीटर रखा गया है, तो 1,000 वर्ग मीटर के निर्मित क्षेत्र के लिए यह शुल्क 10,000 रुपये होगा।

700 आर्किटेक्ट्स की मदद ली जाएगी

इस पूरे सिस्टम में करीब 700 सरकारी मान्यता प्राप्त आर्किटेक्ट्स का पैनल शामिल किया गया है, जो जमीन पर जाकर संपत्तियों का वास्तविक आकलन करेंगे। इन आर्किटेक्ट्स की जिम्मेदारी होगी कि वे मौके पर जाकर यह जांच करें कि संबंधित संपत्ति की वास्तविक स्थिति क्या है जैसे कि वह एक मंजिला है, दो मंजिला या तीन मंजिला निर्माण। इसके आधार पर वे सटीक नक्शा तैयार करेंगे।

तैयार किए गए नक्शे और सर्वे डेटा को ‘SWAGAM’ पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। इसी डेटा के आधार पर आगे नियमितीकरण की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक, नियमितीकरण प्रमाण पत्र जारी होने के बाद यह नक्शा सरकारी रिकॉर्ड का हिस्सा बन जाएगा, जिससे संपत्ति की कानूनी स्थिति स्पष्ट और स्थायी रूप से दर्ज हो जाएगी।

अधिकारी ने बताया कि 2019 में शुरू की गई पीएम-उदय योजना के तहत जिन लोगों को अभी तक मालिकाना हक नहीं मिला है, उन्हें अगले एक महीने के भीतर यह अधिकार मिलने की संभावना है। इसके साथ ही, एमसीडी ने यह भी संकेत दिया है कि नियमितीकरण से जुड़े नए आवेदनों पर भी तेजी से काम किया जाएगा और कोशिश होगी कि इन पर लगभग एक महीने के भीतर कार्रवाई पूरी कर दी जाए।

नियमितीकरण होने के बाद ये फायदे

अधिकारी ने बताया कि लगभग 40,000 ऐसे निवासी, जिन्हें पहले से मालिकाना हक मिल चुका है, वे सीधे ‘SWAGAM’ पोर्टल पर आवेदन कर सकेंगे। इससे प्रक्रिया को तेज और सरल बनाने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि एक बार नियमितीकरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन कॉलोनियों में विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके तहत सड़कों, नालियों और अन्य बुनियादी सुविधाओं को सुधारने और मजबूत करने का काम शुरू किया जाएगा।

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m