शब्बीर अहमद, भोपाल। मध्य प्रदेश को देश में दूध उत्पादन के मामले में अव्वल (नंबर वन) बनाने के लिए राज्य सरकार ने अपनी कोशिशें तेज कर दी हैं। इसके तहत पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा ‘गोपालकृष्ण ग्राम पुरस्कार योजना’ की रूपरेखा और शर्तें तय कर दी गई हैं। इस योजना के जरिए ग्रामीण स्तर पर दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने और पशुपालकों को प्रोत्साहित करने की तैयारी है।

5 साल के लिए 35 करोड़ का बजट और मुख्य लक्ष्य

इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत राज्य सरकार हर साल 7 करोड़ रुपये खर्च करेगी। इस प्रकार आगामी 5 वर्षों के लिए कुल 35 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में दुग्ध उत्पादन (Milk Production) में 20% की बढ़ोतरी करना है, ताकि मप्र डेयरी सेक्टर में देश का अग्रणी राज्य बन सके।

योजना की रूपरेखा और प्रतियोगिता के नियम

इस योजना के तहत प्रदेश के हर ब्लॉक से एक गांव का चयन किया गया है, जिसके आधार पर कुल 313 ‘वृंदावन गांव’ में प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। इसमें हिस्सा लेने और पुरस्कार जीतने के नियम इस प्रकार हैं। प्रतियोगिता में भाग लेने वाले पशुपालकों/गोपालकों का पंजीयन (रजिस्ट्रेशन) किया जाएगा। इस प्रतियोगिता में केवल वही पशुपालक हिस्सा ले सकेंगे, जिनकी गाय कम से कम 6 लीटर या उससे अधिक दूध देती हो।

किसकी कितनी मिलेगी पुरस्कार राशि?

प्रतियोगिता के दौरान सबसे अधिक दूध देने वाली गाय के गोपालक को राज्य स्तर और स्थानीय स्तर पर सम्मानित किया जाएगा।

प्रथम पुरस्कार: 1 लाख रुपये (सर्वश्रेष्ठ दूध देने वाली गाय के पालक को)
द्वितीय पुरस्कार: 50 हजार रुपये
तृतीय पुरस्कार: 25 हजार रुपये

सरकार की इस अनूठी प्रोत्साहन योजना से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ-साथ पशुपालकों में उच्च नस्ल के मवेशी पालने और दूध उत्पादन बढ़ाने को लेकर स्वस्थ प्रतिस्पर्धा देखने को मिलेगी।

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