चंडीगढ़: पंजाब की सियासत में शिरोमणि अकाली दल और भाजपा के बीच दोबारा नजदीकियां बढ़ने की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। संत हरचंद सिंह लोंगोवाल की 41वीं पुण्यतिथि के मौके पर आयोजित रैली में अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल के बयान के बाद इन अटकलों को और बल मिला है।

हरसिमरत कौर बादल ने अपने संबोधन में सीधे तौर पर भाजपा का नाम नहीं लिया, लेकिन उन्होंने पंजाब के हितों के लिए केंद्र सरकार के साथ बेहतर तालमेल और संवाद की जरूरत पर जोर दिया। उनके इस बयान को राजनीतिक गलियारों में अहम संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

दरअसल, अकाली दल और भाजपा लंबे समय तक पंजाब की राजनीति में एक-दूसरे के प्रमुख सहयोगी रहे हैं। दोनों दलों का गठबंधन करीब ढाई दशक तक राज्य की सियासत में प्रभावशाली रहा। 1997 से 2012 के बीच यह गठबंधन कई चुनावों में सफल रहा और सत्ता तक पहुंचने में अहम भूमिका निभाई।

1997 में पहली बार गठबंधन सरकार

1997 के विधानसभा चुनाव में अकाली दल और भाजपा गठबंधन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 93 सीटों पर जीत दर्ज की थी। इनमें अकाली दल ने 75 और भाजपा ने 18 सीटें जीती थीं। इसके बाद दोनों दलों ने मिलकर सरकार बनाई।

2007 में सत्ता में वापसी

2007 के विधानसभा चुनाव में गठबंधन ने एक बार फिर मजबूत प्रदर्शन किया। दोनों दलों को मिलाकर कुल 68 सीटें मिलीं। अकाली दल ने 49 जबकि भाजपा ने 19 सीटों पर जीत हासिल की और गठबंधन ने सत्ता में वापसी की।

2012 में लगातार दूसरी बार सरकार

2012 का विधानसभा चुनाव भी अकाली दल-भाजपा गठबंधन के लिए बेहद अहम रहा। गठबंधन ने 68 सीटों पर जीत दर्ज कर लगातार दूसरी बार सरकार बनाई। पंजाब के पुनर्गठन के बाद यह पहली बार था जब किसी सत्तारूढ़ गठबंधन ने लगातार दूसरी बार सत्ता हासिल की थी।

2017 के बाद कमजोर हुआ समीकरण

हालांकि 2017 के विधानसभा चुनाव में गठबंधन का प्रदर्शन काफी कमजोर रहा। अकाली दल को सिर्फ 15 सीटें मिलीं, जबकि भाजपा तीन सीटों पर सिमट गई। इसके बावजूद दोनों दलों ने लोकसभा चुनाव में गठबंधन जारी रखा। 2019 के लोकसभा चुनाव में अकाली दल और भाजपा ने मिलकर पंजाब में चार सीटों पर जीत हासिल की।

कृषि कानूनों के मुद्दे पर टूटा था गठबंधन

दोनों दलों के बीच लंबे समय से चला आ रहा राजनीतिक गठबंधन सितंबर 2020 में टूट गया। केंद्र की तत्कालीन कृषि कानूनों को लेकर पैदा हुए विवाद के बीच शिरोमणि अकाली दल ने भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए से अलग होने का फैसला किया था।

अब हरसिमरत कौर बादल के ताजा बयान के बाद एक बार फिर दोनों दलों के संभावित राजनीतिक तालमेल को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, फिलहाल किसी औपचारिक गठबंधन की घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में आने वाले दिनों में अकाली दल और भाजपा के रुख पर सभी की नजरें रहेंगी।