चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रहे शील नागू के सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश पद पर पदोन्नत होने के बाद केंद्र सरकार ने हाई कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश अश्विनी कुमार मिश्रा को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया है। राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद-223 के तहत यह नियुक्ति की है।
केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश का पद रिक्त होने के कारण जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा को नियमित मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति तक हाई कोर्ट के प्रमुख की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
न्यायिक क्षेत्र में लंबा अनुभव
16 नवंबर 1968 को जन्मे जस्टिस मिश्रा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ी मल कॉलेज से अर्थशास्त्र में स्नातक और कैंपस लॉ सेंटर से एलएलबी की पढ़ाई की। वर्ष 1993 में अधिवक्ता के रूप में नामांकन के बाद उन्होंने सिविल, संवैधानिक और सेवा संबंधी मामलों में व्यापक वकालत की।
उन्होंने Indian Farmers Fertiliser Cooperative Limited, Indian Oil Corporation समेत कई प्रमुख संस्थाओं का पक्ष रखा और वर्ष 2013 में वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा प्राप्त किया।
इलाहाबाद हाई कोर्ट से पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट तक का सफर
जस्टिस मिश्रा ने 3 फरवरी 2014 को इलाहाबाद हाई कोर्ट में अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में शपथ ली थी और 2016 में स्थायी न्यायाधीश बने। जुलाई 2025 में उनका तबादला पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में किया गया था।
अपने न्यायिक कार्यकाल में उन्होंने कई महत्वपूर्ण मामलों में फैसले सुनाए। चर्चित निठारी सीरियल किलिंग मामला पर दिए गए उनके निर्णयों की विशेष चर्चा रही। वहीं पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में अवैध खनन और संवैधानिक मामलों पर भी उन्होंने कई अहम आदेश पारित किए।
सुप्रीम कोर्ट में बढ़ी पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट की मौजूदगी
जस्टिस शील नागू के सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के बाद अब शीर्ष अदालत में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से जुड़े चार न्यायाधीश हैं। इनमें सूर्यकांत, ए. जी. मसीह, अरुण पल्ली और शील नागू शामिल हैं।
इस नियुक्ति को हाई कोर्ट के प्रशासनिक और न्यायिक कार्यों की निरंतरता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

