पंजाब कांग्रेस ने 2027 में होने वाली विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी को मजबूत करने के लिए संगठन सृजन अभियान की शुरुआत की है। इस अभियान के तहत पार्टी हाईकमान ने पंजाब के 29 संगठनात्मक जिलों के लिए 29 ऑब्जर्वर नियुक्त किए हैं। जल्द ही सभी जिलों को नए अध्यक्ष मिलेंगे।
पंजाब कांग्रेस के 29 संगठनात्मक जिलों के लिए 19 नवंबर 2022 को जिला अध्यक्षों की घोषणा की गई थी। उस समय राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा चल रही थी, और कई वरिष्ठ नेता कांग्रेस छोड़कर भाजपा व अन्य पार्टियों में शामिल हो गए थे। ऐसी स्थिति में विधायकों को जिम्मेदारी सौंपकर मोर्चा संभाला गया था। कांग्रेस में जिला अध्यक्षों का कार्यकाल 3 साल का होता है, और इसके अनुसार, नए अध्यक्षों की नियुक्ति के लिए चुनाव प्रक्रिया जल्द शुरू होगी। इस बार नए अध्यक्षों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी।

बूथ और मंडल कमेटियों का गठन
पंजाब कांग्रेस ने बूथ कमेटियों के गठन का कार्य शुरू कर दिया है। प्रत्येक 20 बूथों के लिए एक मंडल कमेटी बनाई जाएगी, जिसकी कुल संख्या 1208 होगी। 29 जिला अध्यक्ष (कुछ जिलों में शहरी और ग्रामीण), 280 ब्लॉक अध्यक्ष पहले ही नियुक्त किए जा चुके हैं। इसके अलावा, ग्रामीण क्षेत्रों में गांव कमेटियां और शहरी क्षेत्रों में वार्ड कमेटियां बनाई जा रही हैं।
पार्टी ने 117 विधानसभा क्षेत्रों के लिए ब्लॉक कोऑर्डिनेटर और प्रत्येक दो क्षेत्रों के लिए एक ऑब्जर्वर नियुक्त किया है, जिनकी कुल संख्या 58 है। ये ऑब्जर्वर और कोऑर्डिनेटर सभी कमेटियों की गतिविधियों की निगरानी करेंगे और एक महीने के भीतर पंजाब कांग्रेस कमेटी को अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे।
पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग स्वयं ब्लॉक और मंडल कमेटियों की बैठकों का आयोजन कर रहे हैं। उन्होंने खरड़ विधानसभा क्षेत्र से इसकी शुरुआत की है, जहां वरिष्ठ कांग्रेसी नेता राजवंत राज शर्मा कोऑर्डिनेटर हैं।
- 10 जुलाई महाकाल भस्म आरती: मस्तक पर चंद्र और रजत मुकुट अर्पित कर बाबा महाकाल का राजा स्वरूप में श्रृंगार, यहां कीजिए दर्शन
- जीवन सूक्त : आसानी से बांटा जा सकता है सुप्रभात का उपहार – संदीप अखिल
- ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई हुए सुपुर्द-ए-खाक, मशहद में जुटे लाखों ईरानी
- 8 महीने में तीसरे SHO की छुट्टी, आखिर क्यों ‘हॉट सीट’ बनी सिरसा के रानियां थाने की कुर्सी?
- उफनती नदी में फंसे स्कूली बच्चे, ग्रामीणों ने जान जोखिम में डालकर कराया पार, पुल न होने से बढ़ी चिंता

