चंडीगढ़। भारत में नशीले पदार्थों की तस्करी का तरीका तेजी से बदल रहा है। अब यह कारोबार सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ड्रोन जैसी आधुनिक तकनीक के जरिए भी बड़े पैमाने पर संचालित किया जा रहा है। पिछले पांच वर्षों में ड्रोन के माध्यम से ड्रग्स की तस्करी के मामलों में करीब 100 गुना बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे सुरक्षा एजेंसियों के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है।
इस पूरे नेटवर्क का सबसे ज्यादा असर पंजाब में देखने को मिला है। एनसीबी की रिपोर्ट के अनुसार राज्य में 8.95 लाख कोडीन युक्त कफ सिरप की बोतलें जब्त की गईं। इसके अलावा ब्यूप्रेनॉर्फिन, ट्रामाडोल और अल्प्राजोलम जैसी प्रतिबंधित दवाओं की अवैध सप्लाई भी लगातार बढ़ रही है, जो युवाओं को नशे की गिरफ्त में धकेल रही है।
कूरियर और डाक सेवा भी बनी तस्करों का नया हथियार
हवाई मार्गों पर सुरक्षा बढ़ने के बाद तस्करों ने अब कूरियर और डाक सेवाओं का सहारा लेना शुरू कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक ऐसे मामलों की संख्या लगभग 174 रही, जबकि इन माध्यमों से 972 किलोग्राम नशीले पदार्थ जब्त किए गए। इससे साफ है कि तस्कर नए रास्ते अपनाकर कानून को चुनौती दे रहे हैं।
देशभर में ध्वस्त हुईं 30 गुप्त ड्रग लैब
एनसीबी ने कार्रवाई तेज करते हुए देश के अलग-अलग हिस्सों में चल रही 30 अवैध सिंथेटिक ड्रग निर्माण प्रयोगशालाओं को नष्ट किया। इस अभियान के दौरान 102 लोगों को गिरफ्तार किया गया। यह कार्रवाई पिछले तीन वर्षों की तुलना में कहीं अधिक बड़ी मानी जा रही है।
एमपी, राजस्थान और महाराष्ट्र से चल रहा था बड़ा नेटवर्क
जांच में सामने आया कि मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र में संचालित कई गुप्त ठिकानों पर मेफेड्रोन, एफेड्रिन और गैर-कानूनी साइकोट्रोपिक गोलियों का बड़े पैमाने पर निर्माण किया जा रहा था। इन नेटवर्कों को खत्म करने के लिए एजेंसियों ने अब अंतरराष्ट्रीय ड्रग कार्टेल और उनकी आर्थिक गतिविधियों पर भी शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।
विदेशी तस्करों पर भी कड़ी कार्रवाई
ड्रग तस्करी से जुड़े मामलों में 747 विदेशी नागरिक गिरफ्तार किए गए। इनमें नेपाल के 203, नाइजीरिया के 146 और म्यांमार के 97 नागरिक शामिल हैं। जांच एजेंसियां अब केवल ड्रग्स बरामद करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि तस्करी से जुड़े पैसों के पूरे नेटवर्क की भी जांच कर रही हैं।
836 करोड़ की संपत्ति फ्रीज
एनसीबी ने वित्तीय जांच को प्राथमिकता देते हुए 1,356 मामलों में आर्थिक जांच की। इस दौरान ड्रग कार्टेल से जुड़ी 836 करोड़ रुपये की संपत्ति फ्रीज की गई। यह आंकड़ा पांच वर्ष पहले जब्त की गई 164.93 करोड़ रुपये की संपत्ति की तुलना में कई गुना अधिक है।
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