चंडीगढ़। पंजाब सरकार और किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच शुक्रवार देर रात तक चली अहम बैठक किसी ठोस निर्णय के बिना समाप्त हो गई। बैठक के दौरान अधिकारियों ने माना कि लैंड मॉर्गेज बैंकों ने किसानों से ऋण प्रक्रिया के दौरान रजिस्ट्री के साथ खाली हस्ताक्षरित चेक भी सुरक्षा के तौर पर लिए थे। इस स्वीकारोक्ति के बाद किसान संगठनों ने सरकार पर बैंक अधिकारियों को बचाने का आरोप लगाया और इस पर कड़ा विरोध जताया।
किसान नेताओं ने बैठक में विधानसभा स्पीकर कुलतार सिंह संधवां के समक्ष कई मांगें रखीं। उन्होंने कहा कि किसानों से जबरन लिए गए सभी खाली चेक तुरंत वापस किए जाएं। साथ ही इस पूरे मामले में कथित अनियमितता और धोखाधड़ी के लिए जिम्मेदार बैंक प्रबंधकों एवं कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए।
इसके अलावा किसानों ने शंभू और खनौरी बॉर्डर पर आंदोलन के दौरान हुए नुकसान का उचित मुआवजा देने तथा कर्जदार किसानों को राहत पहुंचाने के लिए वन टाइम सेटलमेंट (ओटीएस) योजना लागू करने की मांग भी दोहराई।
बैठक से कोई समाधान नहीं निकलने पर संयुक्त किसान मोर्चा (नॉन-पॉलिटिकल) और भारतीय किसान यूनियन (सिद्धूपुर) ने आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। किसान संगठनों के अनुसार 5 अगस्त को ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ फरीदकोट स्थित विधानसभा स्पीकर के आवास का घेराव कर अनिश्चितकालीन पक्का मोर्चा शुरू किया जाएगा।

किसान नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन का दायरा पूरे पंजाब में बढ़ाया जाएगा और सरकार के खिलाफ संघर्ष को और तेज किया जाएगा।
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