कुंदन कुमार, पटना। पूर्णिया के सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने पटना स्थित अपने आवास पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि देश की मौजूदा राजनीति से जवाबदेही पूरी तरह खत्म हो चुकी है और सत्ता में बैठे लोग विपक्ष के सवालों से डरकर संसद से भाग रहे हैं।
बीजेपी का असली चरित्र अपराधियों का सम्मान करना है
सांसद पप्पू यादव ने अपने ऊपर हुए हालिया हमले का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि जिस व्यक्ति पर हत्या के प्रयास का गंभीर मामला दर्ज होना चाहिए था, उत्तर प्रदेश की बीजेपी सरकार द्वारा उसका भव्य स्वागत किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमित शाह की पुलिस की मौजूदगी में एक सांसद पर हमला करने वाले तत्वों को आज खुलेआम सम्मानित किया जा रहा है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि बीजेपी का चाल, चरित्र और चेहरा हमेशा से अपराधियों को संरक्षण देना रहा है, जिसके चलते कभी बलात्कारियों की रिहाई पर जश्न मनाया जाता है तो कभी हत्यारों को माला पहनाई जाती है।
संसद का गतिरोध और जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन
पिछले 15 दिनों से संसद के लगातार ठप रहने पर उन्होंने कहा कि सरकार विपक्ष के तीखे सवालों का सामना करने से बच रही है। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से सीधे सदन में आकर जवाब देने की मांग की।
इसके साथ ही, जंतर-मंतर पर हुए जेन-जी आंदोलन का जिक्र करते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठियां क्यों बरसाई गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस की आड़ में सादे लिबास में कुछ असामाजिक तत्वों ने छात्रों को पीटा, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने आंदोलनकारी छात्रा नेहा वोरा का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए बताया कि सवाल पूछने पर उन पर स्याही फेंकी गई और उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। महिला आरक्षण के मुद्दे पर उन्होंने सरकार को घेरते हुए कहा कि जब सत्ता में बैठे लोग नारी सशक्तिकरण की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, तो फिर हक मांगने वाली बेटियों पर लाठियां और धमकियां क्यों चलवाई जा रही हैं।
राम मंदिर ट्रस्ट और नीट पेपर लीक पर बड़े खुलासे
राम मंदिर ट्रस्ट में हुए कथित चढ़ावा चोरी के मामलों पर उन्होंने सरकार से श्वेत पत्र की मांग की। पप्पू यादव ने कहा कि यदि प्रधानमंत्री अयोध्या और राम मंदिर निर्माण का श्रेय लेते हैं, तो उन्हें यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि करोड़ों के चंदे में हेराफेरी कैसे हुई। उन्होंने चम्पत राय, गोविंद गिरी और नृपेन्द्र मिश्रा का नाम लेते हुए पूछा कि इन पर कानूनी शिकंजा क्यों नहीं कसा जा रहा।
दूसरी ओर, नीट पेपर लीक मामले से आहत छात्रों के लिए उन्होंने बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि इस कांड की वजह से आत्महत्या करने वाले 21 छात्रों के परिजनों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक मदद दी जाएगी। इसके अलावा, आंदोलन के दौरान घायल हुए संघर्षरत छात्रों को 25-25 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाएगी।
बिहार की सियासत और EO विमल कुमार हत्याकांड
बिहार के राजनीतिक परिदृश्य पर बात करते हुए उन्होंने राज्य के विपक्ष की निष्क्रियता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि देश में इतनी बड़ी घटनाएं घट रही हैं, लेकिन बिहार का मुख्य विपक्ष संसद में बिल्कुल नदारद नजर आया।
इसके अलावा, आर्थिक अपराध इकाई (EO) के अधिकारी विमल कुमार की संदिग्ध हत्या के मामले में उन्होंने उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। उन्होंने सवाल किया कि बिहार पुलिस हर संवेदनशील मामले में खुद जज की भूमिका में क्यों आ जाती है। उन्होंने कहा कि महज एक ड्राइवर को फौरी तौर पर दोषी ठहरा देना न्यायसंगत नहीं है, क्योंकि इस साजिश के पीछे कई अन्य बड़े चेहरे भी हो सकते हैं। उन्होंने यह भी गंभीर आरोप लगाया कि पीड़ित परिवार पर लगातार दबाव बनाकर उनसे जबरन सरकार के पक्ष में बयान दिलवाया जा रहा है। अंत में उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले घटना के प्रत्येक पहलू की पारदर्शी जांच बेहद आवश्यक है।


