Dharm Desk- इस साल एक दुर्लभ संयोग बना है. जब ज्येष्ठ मास के साथ ही अधिक मास यानी पुरुषोत्तम मास का आरंभ हुआ, आमतौर पर हर चार वर्ष में आने वाला यह पवित्र महीना इस बार 17 मई से 15 जून तक चलेगा. खास बात यह है कि करीब 27 साल बाद ऐसा योग बना है जब ज्येष्ठ मास में ही अधिक मास जुड़ गया है. इसके कारण इस बार ज्येष्ठ मास 30 नहीं बल्कि पूरे 60 दिनों का हो गया है. साल में कुल 13 महीने हो गए हैं. पुरुषोत्तम मास भगवान विष्णु को समर्पित होता है. इस दौरान पूजा-पाठ, दान-पुण्य और आत्मशुद्धि का विशेष महत्व बताया गया है. शास्त्रों में कहा गया है कि इस महीने किए गए जप-तप का कई गुना फल देते है. हालांकि, इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश, सगाई जैसे सभी मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं.

पुरुषोत्तम मास में क्या करना चाहिए
पुरुषोत्तम मास में प्रतिदिन भगवान विष्णु की पूजा करें. ओम नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें. विष्णु सहस्त्रनाम या विष्णु चालीसा का पाठ करना अत्यंत शुभ होता है. जरूरतमंदों को वस्त्र, फल, सब्जी और जल से भरे घड़े का दान करें. विशेष रूप से कांसे के बर्तन और मालपुए का दान करने का भी महत्व बताया गया है. इस दौरान यदि संभव हो तो पवित्र नदी में स्नान करें, अन्यथा घर पर ही गंगाजल मिलाकर स्नान करना भी फलदायी माना जाता है. साथ ही श्रीमद्भागवत या गीता का पाठ करने से मानसिक शांति प्राप्त होती है.
पुरुषोत्तम मास में क्या नहीं करना चाहिए
अधिक मास के दौरान कोई भी नया या शुभ कार्य शुरू नहीं करना चाहिए. शादी-विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे संस्कारों को इस दौरान वर्जित माना गया है. इस महीने तामसिक भोजन जैसे लहसुन-प्याज का सेवन नहीं करना चाहिए. साथ ही झूठ बोलने, अपमान करने और गलत व्यवहार से भी दूर रहना चाहिए, क्योंकि इससे पुण्य फल नष्ट हो सकते है.
क्यों पड़ता है अधिक मास
दरअसल, अधिक मास सूर्य और चंद्रमा की गति के अंतर को संतुलित करने के लिए जोड़ा जाता है. चंद्र वर्ष और सौर वर्ष में लगभग 11 दिनों का अंतर होता है, जो समय के साथ बढ़कर एक महीने के बराबर हो जाता है. इसी अंतर को संतुलित करने के लिए यह अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है. जिसे अधिमास, मलमास या पुरुषोत्तम मास कहा जाता है.
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