अमित पांडेय, खैरागढ़। जिले के एक शिक्षिका की इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय से पीएचडी को लेकर ऐसा मामला सामने आया है, जिसे सुनकर हर कोई हैरान है। आरोप है कि पीएचडी करते समय शिक्षिका एक ही समय में दो जगह यानि स्कूल और विश्वविद्यालय में हाजिरी लगा रही थी और छुट्टियों का भी गलत तरीके से इस्तेमाल कर रही थी। अब प्रशासन ने इस पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।

जानकारी के मुताबिक, शासकीय हाईस्कूल लिमतरा में पदस्थ शिक्षिका निकेता सिंह ने इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय से रेगुलर तरीके से पीएचडी की। रेगुलर पीएचडी का मतलब होता है कि आपको विश्वविद्यालय में जाकर नियमित पढ़ाई और रिसर्च करनी होती है, लेकिन आरोप है कि उसी समय शिक्षिका अपने स्कूल में भी रोज हाजिरी लगाती रही। यानी एक ही समय में दो जगह मौजूद दिखाया गया, जो नियमों के खिलाफ है।

शिकायत में बताया गया है कि 2011 से 2015 के बीच कई ऐसे दिन हैं, जब शिक्षिका विश्वविद्यालय की संगोष्ठियों और कार्यक्रमों में शामिल थी, लेकिन उन्हीं दिनों में स्कूल के रिकॉर्ड में उनकी उपस्थिति भी दर्ज है। इसी बात ने पूरे मामले को और संदिग्ध बना दिया है। इसके अलावा मेडिकल छुट्टी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि कुछ समय के लिए शिक्षिका ने मेडिकल लीव ली, लेकिन उसी दौरान वे पीएचडी से जुड़ी गतिविधियों में सक्रिय थी। ऐसे में यह सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या मेडिकल छुट्टी का गलत इस्तेमाल किया गया।

नियमों का ठीक से पालन नहीं करने का आरोप

जिला पंचायत से मिली अनुमति (NOC) में साफ लिखा था कि पढ़ाई के लिए अलग से छुट्टी नहीं मिलेगी और सिर्फ परीक्षा के दिन ही अवकाश मिलेगा। साथ ही यह भी शर्त थी कि स्कूल की पढ़ाई पर असर नहीं पड़ना चाहिए, लेकिन शिकायत में कहा गया है कि इन नियमों का ठीक से पालन नहीं हुआ। इतना ही नहीं, पीएचडी के दौरान दी गई व्यक्तिगत जानकारी पर भी सवाल उठाए गए हैं। साथ ही पीएचडी के आधार पर मिली वेतन बढ़ोतरी को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया है।

डीईओ ने दिए जांच के आदेश

शिकायतकर्ता का कहना है कि अगर डिग्री गलत तरीके से हासिल की गई है तो सरकार को हुआ नुकसान वापस लिया जाना चाहिए। मामले को गंभीर मानते हुए जिला शिक्षा अधिकारी, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई ने 20 अप्रैल 2026 को जांच के आदेश दे दिए हैं। प्राचार्य को जांच की जिम्मेदारी दी गई है और 15 दिनों के भीतर पूरी रिपोर्ट मांगी गई है। साथ ही कहा गया है कि दोनों पक्षों को सुनकर निष्पक्ष जांच की जाए। अब सबकी नजर जांच रिपोर्ट पर है। अगर आरोप सही साबित होते हैं तो यह मामला आगे और बड़ा रूप ले सकता है और सख्त कार्रवाई भी हो सकती है।

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