कुंदन कुमार/ पटना। बिहार की राजनीति में इन दिनों पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी द्वारा भोजपुरी गायक छोटू छलिया को तोहफे में दिए गए कंगन को लेकर घमासान मचा हुआ है। लालू प्रसाद यादव के जन्मदिन पर दिए गए इस कंगन के ‘हीरे’ का होने का दावा गायक द्वारा किए जाने के बाद से यह मामला तूल पकड़ गया है।
JDU का सवाल: कहां से आया कंगन?
JDU प्रवक्ता नीरज कुमार ने इस मामले में मोर्चा खोलते हुए आर्थिक अपराध इकाई (EOU) को पत्र लिखा है। उन्होंने कंगन की प्रामाणिकता और उसके स्रोत पर कड़े सवाल उठाए हैं। नीरज कुमार का तर्क है कि यदि कंगन वास्तव में हीरे या किसी कीमती रत्न से बना है तो उसका सोर्स, खरीदारी की रसीद और बाजार मूल्य स्पष्ट होना चाहिए। JDU ने आयकर अधिनियम 1961, बेनामी लेनदेन अधिनियम 1988 और धन शोधन निवारण अधिनियम 2002 का हवाला देते हुए इस पूरे मामले की गहन और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
EOU को पत्र में क्या कहा गया?
नीरज कुमार ने EOU के अपर पुलिस महानिदेशक को भेजे गए आधिकारिक पत्र में इस बात पर जोर दिया है कि चूंकि मामला सार्वजनिक और मीडिया में चर्चा का विषय बना है इसलिए इसकी वित्तीय पारदर्शिता जांचना जरूरी है। पत्र में लालू परिवार से जुड़े पूर्व के जमीन के बदले नौकरी मामले का भी उल्लेख किया गया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इस उपहार के पीछे कोई अवैध वित्तीय लेन-देन तो नहीं है।
RJD का बचाव और सफाई
इस विवाद पर RJD ने पलटवार करते हुए इसे विपक्ष की साजिश बताया है। राबड़ी देवी के करीबी और RJD MLC सुनील सिंह ने स्पष्ट किया है कि राबड़ी देवी कभी हीरे के आभूषण नहीं पहनती हैं। उन्होंने कहा कि हर चमकने वाली चीज हीरा नहीं होती और JDU बेवजह के मुद्दों को उछालकर जनता को भटकाने की कोशिश कर रही है।
फिलहाल यह मामला अब जांच एजेंसियों के पाले में है। जहां एक ओर गायक छोटू छलिया ने इसे कीमती उपहार बताया है वहीं RJD इसे मात्र एक सामान्य तोहफा मानकर विवाद को खत्म करने की कोशिश में है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि EOU इस मामले में क्या रुख अपनाती है।

