जुबैर अंसारी, सुपौल। जिले के प्रखंड क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय दीपनगर बिचारी में विद्यालय की निर्धारित अवधि के दौरान एक शिक्षक के क्लासरूम में सोते पाए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस घटना ने एक बार फिर सरकारी विद्यालयों की कार्यप्रणाली और बच्चों के भविष्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

​क्या है पूरा मामला?

​यह पूरा घटनाक्रम विद्यालय की अवधि के दौरान सामने आया, जब लगभग साढ़े ग्यारह बजे मौके पर मौजूद एक पत्रकार ने इस लापरवाही को अपने कैमरे में कैद किया। सामने आए वीडियो फुटेज में शिक्षक विनय कुमार झा उर्फ बिट्टू झा विद्यालय के एक कमरे में गहरी नींद में सोते हुए नजर आ रहे हैं। वहीं, उनके ठीक सामने मासूम बच्चे बैठकर सिर्फ उनका मुंह ताक रहे थे।
​जब मीडिया कर्मी ने आवाज देकर शिक्षक को जगाया, तो वह हड़बड़ाकर उठे। हद तो तब हो गई जब सोते हुए उठे शिक्षक के मुंह में गुटखा पाया गया। कैमरे के सामने आने पर उन्होंने अपना मुंह छिपाने की कोशिश की, जो वायरल वीडियो में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।

​ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों में भारी आक्रोश

​स्थानीय वार्ड सदस्यों और ग्रामीणों का आरोप है कि यह कोई पहली बार नहीं है। उनका कहना है कि संबंधित शिक्षक का यह पुराना रवैया रहा है और वे पहले भी स्कूल के समय में शिक्षण कार्य के प्रति घोर लापरवाही बरतते आए हैं। घटना के वक्त विद्यालय के प्रधानाध्यापक दो दिनों के अवकाश पर थे, ऐसे में स्कूल की पूरी शैक्षणिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी वहां मौजूद अन्य शिक्षकों के कंधों पर ही थी।
​अभिभावकों और ग्रामीणों का कहना है कि जिस समय बच्चों के भविष्य को गढ़ने के लिए उन्हें पढ़ाया जाना चाहिए, उस समय एक शिक्षक का सोते रहना बेहद शर्मनाक और गैर-जिम्मेदाराना हरकत है। इससे बच्चों की पढ़ाई का नुकसान तो हो ही रहा है, साथ ही सरकारी विद्यालयों की निगरानी व्यवस्था की पोल भी खुल रही है।

​निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग

​घटना के बाद से इलाके के लोगों में भारी नाराजगी व्याप्त है। ग्रामीणों ने प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEF) और जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) से इस पूरे मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराने की पुरजोर मांग की है।
​ग्रामीणों ने अनुरोध किया है कि विद्यालय की उपस्थिति पंजी (अटेंडेंस रजिस्टर), घटना के समय मौजूद शिक्षकों की वास्तविकता और वायरल वीडियो की तकनीकी जांच की जानी चाहिए। जनता की मांग है कि जांच में दोष सिद्ध होने पर संबंधित शिक्षक से तुरंत स्पष्टीकरण मांगते हुए नियमानुसार कड़ी विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की पुनरावृत्ति न हो सके। हालांकि, खबर लिखे जाने तक आरोपी शिक्षक, प्रधानाध्यापक या शिक्षा विभाग के किसी भी अधिकारी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।