Panchkula Murder Case : पंचकूला। करीब 11 साल पुराने हत्या के मामले में पंचकूला जिला अदालत ने दोषी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। सजा से पहले आरोपी गुरनाम सिंह ने अदालत के सामने अपनी पारिवारिक परिस्थितियों का हवाला देते हुए नरमी बरतने की मांग की। उसने बताया कि उसके परिवार में उसकी पत्नी और दो बच्चे हैं, जबकि 95 वर्षीय बीमार मां भी उस पर निर्भर है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हत्या के दोषी गुरनाम सिंह को उम्रकैद की सजा सुनाई।

टिब्बी माजरा निवासी गुरनाम सिंह को बिजली कर्मचारी सोम कुमार की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया है। अदालत ने उस पर अलग-अलग धाराओं में कुल 52,500 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। मामले की सुनवाई सेशंस जज बिक्रमजीत अरोड़ा की अदालत में हुई।

जमीन विवाद में गई थी बिजली कर्मचारी की जान

मामला वर्ष 2015 का है। टिब्बी माजरा निवासी करीब 32 वर्षीय सोम कुमार रायपुररानी बिजली बोर्ड में कर्मचारी था। जमीन को लेकर चल रहे विवाद के बीच उसकी हत्या कर दी गई थी। 6 दिसंबर 2015 को उसका शव रायपुररानी अनाज मंडी के पीछे बरामद हुआ था।

पुलिस की जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया था कि सोम कुमार की गला दबाकर हत्या की गई थी। जांच के दौरान पुलिस ने गुरनाम सिंह के अलावा देशराज को भी गिरफ्तार किया था। हालांकि अदालत में सुनवाई के दौरान देशराज के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य सामने नहीं आने पर उसे बरी कर दिया गया। वहीं गुरनाम सिंह के खिलाफ साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने उसे हत्या का दोषी माना।

दोषी ने परिवार का हवाला देकर मांगी राहत

सजा तय करने के दौरान गुरनाम सिंह ने अदालत से नरमी बरतने की अपील की। उसने कहा कि वह अपने परिवार का अकेला कमाने वाला है। उसकी पत्नी और दो बच्चे हैं और 95 वर्षीय मां विभिन्न बीमारियों से जूझ रही है। आरोपी ने दावा किया कि मां उसकी देखभाल और आर्थिक मदद पर निर्भर है।

सरकारी वकील प्रदीप शर्मा ने इस दलील का विरोध करते हुए अपराध की गंभीरता को देखते हुए सख्त सजा की मांग की। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने उम्रकैद का फैसला सुनाया।

52,500 रुपये का जुर्माना, फिर भी पीड़ित परिवार के लिए अलग मुआवजा

अदालत ने मुआवजे के मुद्दे पर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि सोम कुमार की मौत से उसके परिवार को जो नुकसान हुआ, उसकी भरपाई किसी भी रकम से पूरी तरह नहीं हो सकती। इसी तरह मामले में घायल कांता देवी को झेलने पड़े शारीरिक और मानसिक कष्ट की भी पूरी भरपाई संभव नहीं है।

अदालत ने माना कि दोषी पर लगाया गया 52,500 रुपये का जुर्माना पीड़ित परिवार के पुनर्वास के लिए पर्याप्त नहीं है। इसी वजह से मामले को हरियाणा विक्टिम कंपनसेशन स्कीम के तहत पंचकूला जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) को भेजने की सिफारिश की गई है।

अब DLSA मृतक के पात्र वारिसों और घायल कांता देवी को नियमों के अनुसार मुआवजा देने की प्रक्रिया तय करेगा। इस तरह करीब 11 साल पुराने इस मामले में आरोपी को उम्रकैद तो मिली ही, अदालत ने पीड़ित परिवार के पुनर्वास के लिए मुआवजे का रास्ता भी साफ किया है।