रायपुर। भारतीय जनता पार्टी द्वारा आपातकाल की विभीषिका को “आपातकाल एक काला दिवस” के रूप में मनाया जाता है। इसी कड़ी में बुधवार को जिलाध्यक्ष रमेश सिंह ठाकुर के नेतृत्व में रायपुर शहर जिला कार्यालय एकात्म परिसर में प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। रायपुर पश्चिम विधायक राजेश मूणत ने कार्यालय में उपस्थित प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के साथियों के समक्ष आपातकाल के दिनों को याद करते हुए उस पर विस्तृत प्रकाश डाला।

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राजेश मूणत ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी 25 जून की तारीख को दशकों से काले दिवस के रूप में मनाती आ रही है। वर्ष 1975 में लगाए गए आपातकाल को अब 51 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा इसे भारतीय लोकतंत्र की हत्या का सबसे काला अध्याय मानती है। आपातकाल का दंश आज भी मन में शूल की तरह चुभता है।

उन्होंने आगे कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र पर एक स्याह धब्बे की तरह है। उस समय कांग्रेस सरकार का विरोध करने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं में भय का माहौल था। कब किसे कहाँ से उठाकर जेलों में डाल दिया जाएगा, इसका कोई मापदंड नहीं था। देश भर में लाखों लोगों को जेलों में डाल दिया गया और देश एक अघोषित खुली जेल बन गया। उन्होंने कहा कि यह कांग्रेस के दामन पर ऐसा दाग है जिसे वह कभी नहीं धो सकती।

भय और दमन का था वातावरण

राजेश मूणत ने कहा कि आपातकाल के 21 महीनों के दौरान देश में भय, आतंक, व्यक्तिवादी विचारधारा और अलोकतांत्रिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया गया। 25 जून को आपातकाल की घोषणा के बाद सामाजिक, गैर-सरकारी संगठनों और पत्रकारों की गतिविधियों पर रोक लगा दी गई। लोकतंत्र की हत्या के लिए देश में तानाशाही प्रवृत्ति हावी हो गई।

उन्होंने आपातकाल के पीछे 1971 के रायबरेली लोकसभा चुनाव और इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्णय का उल्लेख किया। राजनारायण ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के खिलाफ चुनाव में धांधली और सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए याचिका दायर की थी। अदालत ने चुनाव को अवैध घोषित किया और इंदिरा गांधी को छह वर्ष तक चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य ठहराया।

इसके बाद मामला सर्वोच्च न्यायालय में गया, जहां 24 जून 1975 को सशर्त राहत दी गई कि अपील लंबित रहने तक वे प्रधानमंत्री पद पर बनी रह सकती हैं, लेकिन संसद में मतदान नहीं कर सकतीं। इसके बाद देश में राजनीतिक संकट गहरा गया।

25 जून 1975 को हुई थी आपातकाल की घोषणा

राजेश मूणत ने कहा कि इसी राजनीतिक संकट की स्थिति में 25 जून 1975 को तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद द्वारा राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा की गई। इसके बाद विपक्षी नेताओं सहित राजनारायण को भी ‘मीसा’ (MISA) कानून के तहत जेल में डाल दिया गया।

उन्होंने कहा कि आपातकाल समाप्त होने के बाद 1977 में हुए आम चुनाव में राजनारायण ने रायबरेली में इंदिरा गांधी को भारी मतों से पराजित किया।

राजेश मूणत ने कहा कि आपातकाल इस बात का प्रमाण है कि कांग्रेस पार्टी ने सत्ता की लालसा में लोकतंत्र का दमन किया। उन्होंने कहा कि इस दौर में कई परिवारों ने कठिन यातनाएं झेली और जीवनभर के लिए प्रभावित हुए। उन्होंने कहा कि भाजपा आपातकाल के दौरान पीड़ित हुए व्यक्तियों और परिवारों के साथ खड़ी थी, खड़ी है और हमेशा खड़ी रहेगी।

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