Raipur Nagar Nigam : सत्या राजपूत, रायपुर. नगर निगम ने अवैध नल कनेक्शन को वैध कराने कराने के लिए भारी भरकम शुल्क वसूलने का फैसला किया है. अवैध नल कनेक्शन को वैध कराने के लिए 20,882 रुपये घरेलू और 30,882 रुपये व्यावसायिक का शुल्क तय कर दिया गया है. इस निर्णय को लेकर सियासत गरमा गई है. नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने निशाना साधते हुए कहा कि महापौर और आयुक्त ने जुर्माना 200 गुना बढ़ा दिया है. निगम जुर्माना के नाम पर वसूली कर रही है. वहीं निगम इसे राजस्व सुदृढ़ीकरण का रास्ता बता रहा है.
दरअसल, एकमुश्त जलकर निपटान और अवैध नल कनेक्शन नियमितीकरण योजना 16 जुलाई से 15 अक्टूबर 2026 तक चलेगी. योजना का उद्देश्य डेटाबेस एकीकरण पुराने बकाये की वसूली और स्थायी राजस्व वृद्धि बताया गया है. पूरा मामला सीधे तौर पर रायपुर की गरीब जनता से जुड़ा हुआ है. शुल्क में हुई बढ़ोतरी का निर्णय से सीधे जनता की जेब में आर्थिक बोझ बढ़ेगा.
आकाश तिवारी ने कहा कि साल 2023 में, तत्कालीन कांग्रेस शासन के दौरान, महापौर परिषद ने एमआईसी के जरिए फैसला लिया था कि अवैध कनेक्शन वैध करने के लिए मात्र 100 रुपये शुल्क और 500 रुपये जुर्माना लिया जाएगा. उद्देश्य साफ था पानी को जीवन का अधिकार मानते हुए गरीब बस्तियों मजदूरों और ठेले वालों को राहत देने के साथ निगम का राजस्व बढ़ाना. अब भाजपा शासित निगम ने इसे 20,000 रुपये के करीब पहुंचा दिया है.
शहर में 90 हजार अवैध कनेक्शन
निगम का तर्क है कि शहर में लगभग 90,000 अवैध कनेक्शन चल रहे हैं, जबकि वैध सिर्फ 2.21 लाख हैं. कुल भवनों की संख्या करीब 3.50 लाख के आसपास बताई जा रही है, ये अवैध कनेक्शन जल राजस्व को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं.
नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने कहा कि यह फैसला जनविरोधी, अमानवीय और गरीबों को पानी से वंचित करने वाला है. क्या रायपुर की जनता सिर्फ टैक्स चुकाने और जुर्माना भरने के लिए बनी है? अवैध नल कनेक्शन को वैध किए जाने की जरूरत है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि लोगों पर भारी-भरकम आर्थिक बोझ डाल दिया जाए.
उन्होंने आरोप लगाया कि पहले अवैध नल कनेक्शन को वैध कराने के लिए शुल्क अब सीधे 20 हजार रुपये कर दिया गया है, जो आम लोगों पर “ट्रिपल अटैक” है. नेता प्रतिपक्ष ने चेतावनी दी कि यदि नगर निगम ने इस निर्णय को वापस लेने की मांग की है. आदेश वापस नहीं होने पर चेतावनी दी कि सड़क से लेकर सदन तक कांग्रेस आंदोलन करेगी.
निगम के निर्णय को लेकर आम जनता में आक्रोश
इसे लेकर गरीब और निम्न आय वर्ग की बस्तियों में नाराजगी देखने को मिल रही है. एक ठेला संचालक ने नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर कहा, कि अगर नल कनेक्शन काट दिए गए तो बच्चे और बुजुर्ग पानी कैसे पिएंगे? 20 हजार रुपये की पेनल्टी देना तो दूर, 2 हजार रुपये जुटाना भी मुश्किल है.
वहीं, भाजपा के कुछ पार्षदों ने भी अनौपचारिक बातचीत में चिंता जताई. उनका कहना है कि यह फैसला समस्या के समाधान के बजाय लोगों की मुश्किलें बढ़ा सकता है. जिन क्षेत्रों में इस तरह की कार्रवाई होगी और भारी जुर्माना लगाया जाएगा, वहां जनप्रतिनिधियों को जनता के विरोध का सामना करना पड़ेगा. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के भीतर इस मुद्दे पर खुलकर विरोध दर्ज कराना उनके लिए आसान नहीं है.
महापौर और आयुक्त से सुलगते सवाल ?
- क्या 200 गुना बढ़ोतरी न्यायसंगत है ? जब शहर में नियमित पानी सप्लाई नहीं है, सफाई ठप है और टैंकरों की मांग पूरी नहीं हो पा रही है, तो अचानक इतना भारी शुल्क क्यों लगा? क्या गरीब परिवार 20 हजार रुपये एकमुश्त कहां से लाएंगे ?
- पानी अधिकार है या व्यापार? संविधान और विभिन्न अदालती फैसलों में पानी को बुनियादी अधिकार माना गया है. क्या पानी सप्लाई को निगम व्यापार बना रहा है? पूर्व नीति में इसे सेवा के रूप में देखा गया था.
- क्या सुविधाएं पहले नहीं सुधारनी चाहिए? यूजर चार्ज बढ़ाने के बाद अब कनेक्शन शुल्क में भारी उछाल है. निगम पहले पानी की उपलब्धता, पाइपलाइन की मरम्मत और 24×7 सप्लाई सुनिश्चित क्यों नहीं करता है?
- 90 दिनों की समयसीमा और 3 गुना जुर्माने की धमकी? अगर कोई गरीब व्यक्ति समय पर आवेदन नहीं कर पाया तो कनेक्शन काटा जाएगा या तीन गुना शुल्क लगेगा. क्या यह अमानवीय नहीं है ?
- क्या राजस्व बढ़ाने के अन्य रास्ते नहीं है? अवैध प्लाटिंग, संपत्ति कर वसूली में सुधार, NRW नॉन-रेवेन्यू वॉटर कम करना इन पर ध्यान क्यों नहीं ?
निगम आयुक्त संबित मिश्रा ने आदेश जारी कर योजना को मंजूरी दी है. महापौर एम मीनल चौबे को कॉल किया गया लेकिन खबर बनाने तक कोई जब नहीं मिला है.
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