Rajasthan News: पैरोल पर बाहर रहकर इलाज करवा रहे आसाराम बापू को राजस्थान हाई कोर्ट से बहुत बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म मामले में निचली अदालत से मिली आजीवन कारावास की सजा को बिल्कुल सही माना है। अब बाबा को तुरंत पुलिस के सामने सरेंडर करना होगा।

हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेन्द्र कुमार पुरोहित की बेंच ने आज यह साफ कर दिया कि आसाराम को कोई राहत नहीं मिलेगी। हालांकि, इस मामले में सह-आरोपी शिल्पी और शरतचंद के लिए राहत की खबर आई है। कोर्ट ने उनकी अपील को मंजूर कर लिया है। पीड़िता के वकील पी.सी. सोलंकी ने बताया कि हाई कोर्ट ने आसाराम पर लगा गैंगरेप का आरोप तो हटा दिया है, लेकिन रेप केस में मिली उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। आदेश सख्त है। तुरंत सरेंडर करना ही होगा।

2018 में मिली थी उम्रकैद

यह पूरा मामला साल 2013 का है, जब जोधपुर के मणई आश्रम में एक नाबालिग लड़की से दुराचार की बात सामने आई थी। लंबी सुनवाई के बाद 25 अप्रैल 2018 को स्पेशल कोर्ट ने आसाराम को दोषी पाते हुए आखिरी सांस तक जेल में रहने की सजा सुनाई थी। उसी फैसले के खिलाफ आसाराम ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। कोर्ट ने बीते 20 अप्रैल को सभी पक्षों की बहस सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। जिसके बाद आज कोर्ट ने फैसला सुनाया है।

इलाज के नाम पर बाहर थे बाबा

आसाराम पिछले कुछ समय से बीमारी का हवाला देकर कोर्ट से मिली अंतरिम मेडिकल जमानत पर बाहर चल रहे थे। वे अपना इलाज करवा रहे थे। सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी हाई कोर्ट को निर्देश दिया था कि इस मामले की अपील पर तीन महीने के भीतर फैसला सुनाया जाए। अब जब हाई कोर्ट ने सजा को बरकरार रखा है, तो बाबा के वकीलों के पास रास्ते लगभग बंद हो गए हैं।

जानें कब-कब क्या हुआ

  • 21 अगस्त 2013: जोधपुर के महिला थाने में नाबालिग से रेप की एफआईआर दर्ज हुई।
  • 31 अगस्त 2013: इंदौर के आश्रम से आसाराम को गिरफ्तार किया गया।
  • 25 अप्रैल 2018: जोधपुर कोर्ट ने आसाराम को उम्रकैद की सजा सुनाई।
  • अक्टूबर 2025: हाई कोर्ट ने इलाज के लिए 6 महीने की मेडिकल बेल दी थी।
  • 20 अप्रैल 2026: हाई कोर्ट में सुनवाई पूरी हुई, कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा।
  • 27 मई 2026: हाई कोर्ट ने अपील खारिज की, तुरंत सरेंडर का आदेश दिया।

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