Rajasthan News: शेखावाटी क्षेत्र, जो अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और विशाल मंदिरों के लिए देशभर में प्रसिद्ध है, का प्रवेश द्वार माना जाने वाला रींगस कस्बा आस्था का एक प्रमुख केंद्र है। रींगस से मात्र 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है लोक देवता भैरू बाबा का प्राचीन मंदिर, जिसे श्मशान वाले भैरू जी के नाम से जाना जाता है।

यह मंदिर न केवल स्थानीय लोगों की आस्था का केंद्र है, बल्कि जयपुर के पूर्व सांसद स्व. गिरधारीलाल भार्गव जैसे दिग्गजों की श्रद्धा का भी प्रतीक रहा है। वे लोकसभा चुनाव के परिणाम वाले दिन इस मंदिर में पूजा-अर्चना करने आते थे और जीत की घोषणा के बाद प्रसाद चढ़ाकर जयपुर लौटते थे।
700 साल पुराना है मंदिर का इतिहास
लगभग 700 साल पुराने इस मंदिर से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, ब्रह्मा के पांचवें मुख से भगवान शिव की निंदा करने पर भैरू बाबा, जो शिव के रुद्र अवतार माने जाते हैं, ने ब्रह्मा के उस मुख की हत्या कर दी थी। इससे उन पर ब्रह्महत्या का पाप लगा। इस पाप से मुक्ति के लिए भगवान विष्णु के निर्देश पर भैरू बाबा ने तीनों लोकों की यात्रा शुरू की, जिसकी शुरुआत रींगस से ही मानी जाती है। मंदिर के पुजारी परिवार, जो 14 पीढ़ियों से पूजा-अर्चना कर रहा है, भी इस मान्यता की पुष्टि करता है।
मूर्ति का चमत्कार
पुजारी परिवार के वरिष्ठ सदस्य मामराज गुर्जर बताते हैं कि उनके पूर्वज चरवाहों के रूप में भैरू बाबा की छोटी-सी मूर्ति को यात्रा पर ले जाते थे, ताकि उन्हें श्राप से मुक्ति मिल सके। जब भैरू बाबा श्रापमुक्त हुए, तब गुर्जर परिवार ने मूर्ति को रींगस में स्थापित किया। इसके बाद यह मूर्ति कभी अपनी जगह से नहीं हिली, न ही कोई इसे उठा सका। तभी से रींगस में भैरू बाबा की विशेष पूजा होती है, जिसमें सुबह-शाम आधे घंटे की आरती की जाती है।
मंदिर में प्रसाद के रूप में गुलगुले, पूड़ी, पकौड़ी, लड्डू-पतासे और शराब चढ़ाई जाती है। पहले यहां पशु बलि की प्रथा थी, लेकिन एक संत के आह्वान पर इसे पूरी तरह बंद कर दिया गया। हर साल भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष में यहां भव्य लक्खी मेला आयोजित होता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं।
शेखावाटी की आध्यात्मिक धरोहर
भैरू जी मंदिर शेखावाटी की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह मंदिर न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि क्षेत्र की ऐतिहासिक और पौराणिक कहानियों को भी जीवंत रखता है। रींगस का यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आस्था और विश्वास का प्रतीक बना हुआ है।
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