Rajasthan News: भीलवाड़ा के शाहपुरा से बीजेपी विधायक डॉ. लालाराम बैरवा इन दिनों विवादों के घेरे में हैं। मामला उनकी खुद की संस्था देव गौशाला सेवा संस्थान से जुड़ा है। आरोप है कि विधायक ने गौशाला के नाम पर सरकारी चारागाह की जमीन पर कब्जा कर लिया है। वो भी तब, जब प्रशासन ने जमीन आवंटन की मांग को सिरे से खारिज कर दिया था।

आवंटन से पहले ही तारबंदी

शाहपुरा-केकड़ी मार्ग पर स्थित माता जी का खेड़ा ग्राम पंचायत की चारागाह भूमि इन दिनों चर्चा का केंद्र है। विधायक की संस्था ने यहां गौशाला खोलने के लिए प्रशासन से 5 हेक्टेयर जमीन की मांग की थी। नियमों के मुताबिक, इसके लिए संस्थान का पुराना रिकॉर्ड और गौशाला का संचालन जरूरी था, लेकिन कलेक्टर ने 25 फरवरी 2026 को ही इस आवेदन को यह कहते हुए बंद कर दिया कि शर्तें पूरी नहीं हो रही हैं।

हैरानी की बात ये है कि प्रशासन की ना के बावजूद मौके पर न सिर्फ बोर्ड लगा दिया गया, बल्कि पूरी जमीन की तारबंदी भी कर दी गई। इतना ही नहीं, सरकारी रसूख का इस्तेमाल कर वहां बाकायदा बिजली का कनेक्शन भी ले लिया गया।

मेरी छवि खराब करने की कोशिश

जब इस मामले में सवाल उठे, तो शाहपुरा विधायक डॉ. लालाराम बैरवा ने अपनी सफाई दी। उन्होंने मीडिया से चर्चा में उन्होंने कहा, इस पूरे मामले से मेरा कोई लेना-देना नहीं है। मैंने 2025 में ही उस संस्थान से इस्तीफा दे दिया था। पुराने दस्तावेजों को आधार बनाकर कुछ लोग मेरी राजनीतिक इमेज खराब करने की साजिश रच रहे हैं।

क्या कहता है सरकारी नियम?

राजस्थान भू राजस्व नियम 1957 के तहत चारागाह जमीन के आवंटन के लिए संस्थान का राजस्थान सोसाइटी पंजीयन अधिनियम के तहत वैलिड रजिस्ट्रेशन होना चाहिए। राजस्थान गौशाला अधिनियम 1960 के तहत प्रॉपर पंजीयन अनिवार्य है। गौशाला का पिछले तीन सालों से लगातार संचालन होना जरूरी है।

भीलवाड़ा कलेक्टर ने इन्हीं शर्तों के पूरा न होने पर आवंटन प्रक्रिया को ठंडे बस्ते में डाल दिया था। अब देखना ये है कि प्रशासनिक इनकार के बाद भी सरकारी जमीन पर कब्जा जमाने वालों पर प्रशासन क्या कदम उठाता है। फिलहाल, इस पूरे इलाके में ये चर्चा का विषय बना हुआ है कि सरकारी नियमों को ताक पर रखकर बिजली और तारबंदी कैसे हो गई।

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