Rajasthan News: राजस्थान सरकार ने प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में शिक्षकों की भर्ती का ऐलान किया है, लेकिन यह भर्ती अस्थाई आधार पर होगी. सरकार का यह फैसला अब विवादों में आ गया है. विपक्ष ने इसे गुजरात मॉडल की तर्ज पर ‘शिक्षा वीर’ योजना करार दिया है, वहीं विद्या संबल योजना से जुड़े शिक्षक इसे अपने साथ धोखा बता रहे हैं.
कितने पद, कैसी भर्ती?
राज्य सरकार के मुताबिक प्रदेश के 376 महाविद्यालयों में कुल 10,594 पदों में से 5299 पद शैक्षणिक हैं. लेकिन सरकार ने घोषणा की है कि इन 5299 पदों में से केवल 3540 पदों पर ही भर्ती की जाएगी और वह भी अस्थाई आधार पर. इसका मतलब है कि कॉलेजों में स्थाई शिक्षकों की कमी दूर होने के बजाय, तात्कालिक व्यवस्था से काम चलाया जाएगा.

सरकार ने वेतन 28,500 रुपये तय किया है, जबकि यूजीसी गाइडलाइन के अनुसार यह 57,700 रुपये होना चाहिए. इस विसंगति को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं.
विपक्ष का हमला
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने इस फैसले को उच्च शिक्षा के लिए काला अध्याय बताया. उनका कहना है कि भाजपा सरकार गुजरात मॉडल पर चलते हुए कॉलेजों में स्थाई नियुक्तियों की जगह शिक्षा वीर ला रही है, ठीक वैसे ही जैसे केंद्र सरकार ने अग्निवीर योजना निकाली.
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि यह युवाओं के साथ बड़ा धोखा है. वहीं, जितेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार नेट, सेट और पीएचडी क्वालिफाइड युवाओं को स्थाई नौकरी नहीं दे पा रही, जो बेहद शर्मनाक है.
विद्या संबल से जुड़े शिक्षकों की नाराजगी
डॉ. राम सिंह सामोता समेत विद्या संबल योजना के तहत पढ़ा रहे सहायक आचार्यों का कहना है कि उन्होंने पिछले पांच साल से कॉलेजों में पढ़ाकर संस्थानों को खड़ा किया है. अब सरकार उन्हें बेरोजगार करने जा रही है और नए सिरे से अस्थाई भर्ती करेगी.
उनका आरोप है कि
- न तो उनके समायोजन की बात की जा रही है,
- न उन्हें अनुभव प्रमाणपत्र दिया जा रहा है,
- न ही किसी तरह के बोनस अंक दिए जा रहे हैं.
ऐसे में जिन्होंने वर्षों कॉलेजों को संभाला, वे अचानक बेरोजगार हो जाएंगे और नए आने वाले भी केवल 5 साल तक ही नौकरी कर पाएंगे.
‘शिक्षा वीर मॉडल’ बनाम शिक्षक अधिकार
सहायक आचार्यों का कहना है कि यह मॉडल शिक्षकों को स्थाई अवसर देने के बजाय अस्थिरता और असुरक्षा की ओर धकेलेगा. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी गुजरात केस में टिप्पणी की थी कि शिक्षक राष्ट्र निर्माता हैं, उनके साथ दुर्व्यवहार न किया जाए और उन्हें यूजीसी पे-ग्रेड पर स्थाई नियुक्ति दी जाए. इसके बावजूद राजस्थान सरकार इसका उल्टा कर रही है.
आगे क्या होगा?
शिक्षकों का कहना है कि वे सरकार से मांग करेंगे कि उन्हें नियमित किया जाए, वरना यह मुद्दा विधानसभा में विपक्ष के जरिए उठाया जाएगा. उनका कहना है कि “हमने पांच साल कॉलेजों को संभाला, अब हमें ‘शिक्षा वीर’ बनाकर निकाल देना न्यायसंगत नहीं है.
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