Rajasthan News: मणिपुर के इंफाल जिले में दो साथियों की हत्या के बाद आत्महत्या करने वाले सीआरपीएफ जवान संजय कुमार मेघवाल के अंतिम संस्कार को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। परिजनों ने अंत्येष्टि से इनकार कर दिया है, क्योंकि उनका आरोप है कि सीआरपीएफ द्वारा सैन्य सम्मान नहीं दिया जा रहा और उन्हें सभी सेवा लाभों को लेकर लिखित आश्वासन चाहिए।
परिजनों और ग्रामीणों की नाराजगी
मृतक जवान के परिजनों और गांववालों का कहना है कि जब तक उन्हें सभी लाभों की गारंटी नहीं मिलती, वे अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। इस मामले में सीआरपीएफ के अधिकारी और स्थानीय प्रशासन समझाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकल पाया है।

क्या है पूरा मामला?
गुरुवार रात इंफाल जिले के लामफेल स्थित सीआरपीएफ कैंप में तैनात हेड कांस्टेबल संजय कुमार ने किसी कहासुनी के बाद अपने ही साथियों पर फायरिंग कर दी। इस हमले में सब इंस्पेक्टर तिलकराज और कांस्टेबल राजीव रंजन की मौत हो गई, जबकि 8 अन्य जवान घायल हो गए। इसके बाद संजय कुमार ने खुद को भी गोली मारकर आत्महत्या कर ली।
बता दें कि संजय कुमार झुंझुनू जिले के बिगोदना गांव के निवासी थे। वे 2003 में सीआरपीएफ में भर्ती हुए और हाल ही में मेघालय से मणिपुर ट्रांसफर हुए थे। उनके परिवार में पत्नी अनिता, बेटी एकता और बेटा अमित हैं।
परिजनों का कहना है कि जब संजय कुमार ने वर्दी में अपनी जान दी है, तो उन्हें सैन्य सम्मान मिलना चाहिए। इसके अलावा, वे सीआरपीएफ से सभी पेंशन और अन्य लाभों को लेकर लिखित आश्वासन मांग रहे हैं। वहीं मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पिलानी थानाधिकारी रणजीत सेवदा, पंचायत समिति सदस्य राजकुमार फौजी, और सीआरपीएफ अधिकारियों ने परिजनों और ग्रामीणों से बातचीत की है। हालांकि अंतिम संस्कार को लेकर कोई स्पष्ट निर्णय नहीं हो पाया है।
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