Rajasthan News: राजस्थान के अजमेर से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। यहां के ऐतिहासिक अढ़ाई दिन का झोंपड़ा में हनुमान चालीसा का पाठ करने की तैयारी चल रही है। इसके लिए बाकायदा जिला कलेक्टर को मेल भेजकर अनुमति मांगी गई है। इस खबर के आते ही चौक-चौराहों पर चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।

मंगलवार को पाठ करने की जिद

यह पूरा मामला महाराणा प्रताप सेना से जुड़ा है। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राजवर्धन सिंह परमार ने प्रशासन को मेल भेजकर अगले मंगलवार यानी 19 मई को परिसर के अंदर हनुमान चालीसा पाठ करने की इजाजत मांगी है। परमार का साफ कहना है कि वे लोग वहां कोई हंगामा नहीं करेंगे। वे सिर्फ शांति से अपनी पूजा-पाठ करना चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने पुलिस प्रशासन से सुरक्षा की मांग भी की है।

भोजशाला के फैसले से मिली हिम्मत

संगठन का दावा है कि अढ़ाई दिन का झोंपड़ा कोई सामान्य इमारत नहीं है। यह असल में प्राचीन संस्कृत कंठाभरण विद्यालय और हिंदू मंदिर का ढांचा है। उन्होंने अपने मेल में मध्य प्रदेश की भोजशाला का भी जिक्र किया है।

महाराणा प्रताप सेना के संगठन के संस्थापक राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राजवर्धन सिंह परमार के अनुसार भोजशाला पर कोर्ट के फैसले से देश के करोड़ों हिंदुओं की आस्था मजबूत हुई है। अढ़ाई दिन का झोंपड़ा की दीवारों और खंभों पर आज भी प्राचीन शिल्प साफ दिखाई देते हैं, जो इसके मंदिर होने का सबूत हैं।

क्या बिगड़ेगी अजमेर की कानून-व्यवस्था?

इधर अजमेर के स्थानीय सूत्रों का कहना है कि इस मामले के बाद खुफिया एजेंसियां भी एक्टिव हो गई हैं। हालांकि, संगठन ने साफ किया है कि उनकी वजह से शहर की कानून-व्यवस्था को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा। वे पूरी तरह कानून के दायरे में रहकर यह काम करना चाहते हैं।

बता दें कि 12वीं सदी की यह इमारत देश-विदेश के पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है। अपनी बेजोड़ इंडो-इस्लामिक वास्तुकला और नक्काशीदार खंभों के लिए मशहूर इस जगह पर अब सबकी नजरें प्रशासन के फैसले पर टिकी हैं।

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