Rajasthan News: राजस्थान में पंचायत चुनावों की तारीखों को लेकर सस्पेंस अब सियासी जंग में बदल गया है। दरअसल, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए साफ कहा है कि सरकार न तो संविधान को मान रही है और न ही सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का सम्मान कर रही है। जूली ने चेतावनी दी है कि अगर 15 अप्रैल तक चुनाव नहीं हुए, तो प्रदेश के गांवों के विकास का पहिया पूरी तरह थम सकता है।

1900 करोड़ का फंड अटकने का डर
गौरतलब है कि टीकाराम जूली ने एक बड़ा खुलासा किया है। सूत्रों के अनुसार, यदि समय पर चुनाव नहीं कराए गए, तो केंद्र से मिलने वाला करीब 1900 करोड़ रुपये का बजट रुक सकता है। बता दें कि यह पैसा स्वच्छ भारत मिशन, जल जीवन मिशन और मनरेगा जैसी बड़ी योजनाओं के लिए आता है। जूली ने सवाल उठाया है कि क्या सरकार पंचायत चुनाव से डरकर गांवों के हक का पैसा दांव पर लगा रही है?
नागौर की उस ऐतिहासिक शुरुआत का दिया हवाला
ग्राउंड जीरो से मिल रही जानकारी के अनुसार, जूली ने मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री से पूछा है कि पहले से कर्ज में डूबा राजस्थान इस भारी नुकसान की भरपाई कैसे करेगा? उन्होंने याद दिलाया कि 2 अक्टूबर 1959 को पंडित नेहरू ने नागौर की धरती से ही पंचायती राज की शुरुआत की थी। आज उसी राजस्थान में लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश हो रही है, जो बेहद चिंताजनक है।
प्रशासन की सुस्ती पर उठाए सवाल
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद अभी तक चुनावी तैयारियों में वह तेजी नहीं दिख रही है जिसकी उम्मीद थी। जूली का कहना है कि चुनाव में देरी न केवल लोकतंत्र का अपमान है, बल्कि लाखों ग्रामीण परिवारों के साथ धोखा भी है। अब देखना यह होगा कि सरकार इस पर क्या कदम उठाती है या फिर यह मामला आने वाले दिनों में और बड़ा सियासी रूप लेगा।
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