Rajasthan News: राजस्थान हाईकोर्ट ने नाबालिग बेटी के साथ दुष्कर्म करने वाले एक पिता की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखते हुए रिश्तों को शर्मसार करने वाले मामले में सख्त संदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एक संरक्षक द्वारा किया गया अपराध अक्षम्य है और पीड़ित की विश्वसनीय गवाही ही सजा के लिए पर्याप्त आधार है।

राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ, जिसमें जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस चन्द्रशेखर शर्मा शामिल थे, ने पाली के एक मामले में आरोपी पिता की अपील को खारिज कर दिया। यह मामला मार्च 2023 में सामने आया था, जब 14 वर्षीय पीड़िता के चचेरे भाई ने उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जांच के दौरान सामने आया कि बच्ची लंबे समय से अपने ही पिता के अत्याचारों का शिकार थी।
पीड़िता का साहस इस मामले की सबसे बड़ी ताकत रहा। जब परिवार के अन्य सदस्यों ने उसकी शिकायत पर यकीन नहीं किया, तो उसने अपने मोबाइल से वीडियो रिकॉर्ड कर सबूत जुटाए। पाली की विशेष पॉक्सो अदालत ने इसी वीडियो और पीड़िता के बयानों को आधार बनाकर आरोपी को प्राकृतिक जीवनकाल तक की उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के इस फैसले को सही ठहराया है।
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