Rajasthan News: रविवार की रात बांसवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल में अचानक आग की लपटें उठने लगीं। देखते ही देखते जिले के इस सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में चीख-पुकार मच गई। आग रिकॉर्ड रूम की छत पर लगी थी, जिसने कुछ ही देर में भयानक रूप ले लिया। गनीमत यह रही कि आग वार्डों तक नहीं पहुंची, वरना बड़ा हादसा हो सकता था।

रिकॉर्ड रूम ही क्यों?
अस्पताल में लगी इस आग ने अब एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। दरअसल, आग ठीक उसी जगह लगी जहां अस्पताल के सालों पुराने और महत्वपूर्ण दस्तावेज रखे हुए थे। वहीं इस मामले में प्रशासन कुछ भी साफ बोलने से बच रहा है।
जैसे ही आग लगी तुरंत दमकल विभाग को सूचना दी गई। घंटों मशक्कत की और लपटों पर काबू पाया जा सका। पीएमओ डॉ. राजेश चौधरी ने बताया कि अगर फायर ब्रिगेड पहुंचने में थोड़ी भी देर होती, तो आग अस्पताल के बाकी हिस्सों को भी अपनी चपेट में ले लेती।
जांच टीम अब इस बात का पता लगा रही है कि आग आखिर लगी कैसे। क्या यह शॉर्ट सर्किट था या किसी की शरारत? रिकॉर्ड रूम की छत तक ही आग सीमित रहने से एक बड़ी तबाही टल गई। अगर आग कमरे के अंदर दाखिल हो जाती, तो बांसवाड़ा के हजारों मरीजों का पुराना रिकॉर्ड जलकर राख हो जाता। फिलहाल, अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि इतने बड़े अस्पताल में आग लगने के वक्त अलर्ट सिस्टम ने काम क्यों नहीं किया।
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