यमुनानगर जिले के सैकड़ों स्कूलों में मिड डे मील की सप्लाई ठप होने से शिक्षकों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है। राशन की कमी के कारण शिक्षक बाजार से फुटकर सामान खरीदकर योजना को चालू रखने का प्रयास कर रहे हैं।

यमुनानगर। जिले के सरकारी स्कूलों में बच्चों को मिलने वाले मिड डे मील पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। जिले के लगभग 592 प्राथमिक और 213 माध्यमिक स्कूलों में राशन की सप्लाई पिछले काफी समय से बाधित है। स्थिति यह हो गई है कि स्कूलों में गेहूं, चावल, दाल और मसालों का स्टॉक पूरी तरह खत्म हो चुका है। करीब 62 हजार विद्यार्थियों के भोजन को सुनिश्चित करने के लिए अब स्कूल प्रभारियों, शिक्षकों और मिड डे मील वर्कर्स को अपनी जेब से पैसे खर्च कर बाजार से फुटकर में राशन खरीदना पड़ रहा है।

एजेंसियों की लापरवाही से लड़खड़ाई योजना

मिड डे मील योजना के तहत गेहूं और चावल की आपूर्ति भारतीय खाद्य निगम (FCI) द्वारा की जाती है, जबकि अन्य खाद्य सामग्री जैसे दाल, तेल और मसाले हरियाणा एग्रो उपलब्ध कराता है। शिक्षक संगठनों का आरोप है कि इन एजेंसियों से समय पर सप्लाई न पहुंचने के कारण व्यवस्था पूरी तरह लड़खड़ा गई है। प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रधान सुरेंद्र कांबोज ने बताया कि पहले शिक्षक स्वयं बाजार से गुणवत्ता परखकर राशन खरीदते थे, लेकिन अब पैक सामग्री आती है जिसकी गुणवत्ता की जांच करना कठिन होता है। कई बार खराब सामग्री मिलने की शिकायतें भी सामने आई हैं, जिससे समस्या और गंभीर हो गई है।

अधिकारियों का आश्वासन और जमीनी हकीकत

मिड डे मील यूनियन की राज्य सचिव शरबती ने सरकार के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जमीनी स्तर पर राशन उपलब्ध न होना विभाग की बड़ी लापरवाही है। इस मामले में जिले के मौलिक शिक्षा अधिकारी अशोक राणा का कहना है कि राशन की डिमांड भेजी जा चुकी है और संबंधित एजेंसियों से लगातार बातचीत जारी है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि जल्द ही सभी स्कूलों में राशन की नई सप्लाई शुरू कर दी जाएगी। फिलहाल, शिक्षक इस उम्मीद में अपने निजी खर्च पर बच्चों को भोजन उपलब्ध करा रहे हैं कि विभाग जल्द ही इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान निकालेगा।

बजट और प्रबंधन की अतिरिक्त चुनौतियां

स्कूलों में भंडारण की पर्याप्त व्यवस्था न होने के बावजूद, अनियमित सप्लाई के कारण प्रबंधन को अतिरिक्त राशन रखने की जद्दोजहद करनी पड़ती है। शिक्षकों का कहना है कि फुटकर बाजार से सामान खरीदना थोक की तुलना में काफी महंगा पड़ता है, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। मिड डे मील वर्कर्स और शिक्षक संगठनों ने सरकार से मांग की है कि सप्लाई चेन को दुरुस्त किया जाए ताकि बच्चों के पोषण और शिक्षकों के मनोबल पर कोई विपरीत प्रभाव न पड़े।