Rajasthan News: ईरान और इजरायल के बीच अचानक छिड़े युद्ध ने न केवल वैश्विक राजनीति में हड़कंप मचा दिया, बल्कि हजारों किलोमीटर दूर बैठे राजस्थानी परिवारों की रातों की नींद भी उड़ा दी थी। अंतरराष्ट्रीय एयर स्पेस बंद होने और दुबई एयरपोर्ट पर फ्लाइट्स रद्द होने के कारण मौत के साये में फंसे जोधपुर के 120 श्रद्धालुओं के लिए गुरुवार, 5 मार्च 2026 की सुबह एक नया जीवन लेकर आई।

सूरसागर के बड़े रामद्वारा के संत अमृत राम महाराज के सानिध्य में दुबई गए ये श्रद्धालु आखिरकार सुरक्षित अपने घर लौट आए हैं। जोधपुर एयरपोर्ट पर जैसे ही इन यात्रियों ने कदम रखा, वहां मौजूद परिजनों की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े, लेकिन इस राहत के पीछे बीते छह दिनों का वो खौफनाक मंजर भी था जिसे याद कर आज भी ये लोग सिहर उठते हैं।
जानकारी के मुताबिक, यह पूरा जत्था 24 से 27 फरवरी तक दुबई में आयोजित एक विशेष कथा और धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होने गया था। योजना के अनुसार, सभी श्रद्धालुओं को 28 फरवरी को ही भारत लौटना था, लेकिन ऐन वक्त पर इजरायल और ईरान के बीच भड़के मिसाइल हमलों और हवाई हमलों के कारण मध्य पूर्व का आकाश ‘नो फ्लाई जोन’ में बदल गया। दुबई एयरपोर्ट पर उड़ानों का संचालन अचानक ठप हो गया, जिसके बाद ये 120 श्रद्धालु वहीं फंस गए। अगले छह दिनों तक वतन वापसी की गुहार लगाते हुए इन यात्रियों को जिन परिस्थितियों से गुजरना पड़ा, वह बेहद विचलित करने वाली हैं।
जोधपुर लौटे श्रद्धालुओं ने एयरपोर्ट पर अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि वहां की होटलों में उनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया गया। एक श्रद्धालु ने रुआंसे स्वर में बताया कि जैसे ही युद्ध की खबर आई, स्थानीय होटल मालिकों ने अपनी संवेदनशीलता खो दी और कमरों का किराया दो से तीन गुना तक बढ़ा दिया। श्रद्धालुओं को बस में ही घंटों रोककर रखा गया और उनसे पहले पूरा पैसा वसूला गया, उसके बाद ही उन्हें कमरे में प्रवेश दिया गया। यात्रियों का गुस्सा केवल होटल मालिकों पर ही नहीं, बल्कि सरकार की कथित लापरवाही पर भी था, क्योंकि उन्हें वहां अपने हाल पर छोड़ दिया गया था।
आखिरकार, इन श्रद्धालुओं ने निजी एयरलाइंस का सहारा लिया और भारी जद्दोजहद के बाद भारत की धरती पर कदम रखा। कुछ श्रद्धालु अहमदाबाद पहुंचे तो कुछ कोच्चि एयरपोर्ट पर उतरे, जहाँ से वे सड़क और रेल मार्ग के जरिए जोधपुर पहुँचे। संत अमृत राम महाराज ने वतन वापसी पर ईश्वर का आभार जताया, लेकिन उनके चेहरे पर भी अपने शिष्यों को सुरक्षित निकालने की चिंता और थकान साफ नजर आ रही थी।
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