सोहराब आलम/ मोतिहारी। इंडो-नेपाल बॉर्डर पर सुरक्षा एजेंसियों को उस समय एक बड़ी सफलता हाथ लगी जब उन्होंने म्यांमार की एक महिला को संदिग्ध परिस्थितियों में हिरासत में लिया। हरैया थाना क्षेत्र के कस्टम चौक के पास हुई यह कार्रवाई सुरक्षा की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जांच में जो तथ्य सामने आए हैं वे न केवल हैरान करने वाले हैं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कई गंभीर सवाल भी खड़े करते हैं।

​प्यार, शादी और फर्जी दस्तावेज का जाल

प्रारंभिक जांच के अनुसार गिरफ्तार महिला का असली नाम ‘बुमा देवी’ है और वह म्यांमार के यांगून क्षेत्र की निवासी है। इस महिला की मुलाकात सीतामढ़ी जिले के मेजरगंज थाना क्षेत्र के निवासी मोहम्मद सद्दाम मंसूरी से हुई थी। धीरे-धीरे यह मुलाकात प्रेम-प्रसंग में बदल गई जिसके बाद महिला अवैध तरीके से भारत में दाखिल हुई और दोनों ने विवाह कर लिया।
​विवाह के पश्चात अपनी वास्तविक पहचान छिपाने और भारत में स्थायी रूप से रहने के लिए महिला ने एक सोची-समझी साजिश रची। आरोप है कि उसने अवैध माध्यमों से [Aadhaar Redacted] कार्ड बनवाया और खुद को ‘अंजुम खातून’ के नाम से पेश कर रही थी। इस फर्जी पहचान का उपयोग कर वह लंबे समय से भारत में रह रही थी।

​नेपाल के रास्ते थाईलैंड भागने की थी योजना

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार यह महिला नेपाल के रास्ते थाईलैंड जाने की फिराक में थी। हरैया पुलिस और अन्य खुफिया एजेंसियों ने जब नियमित जांच के दौरान उसे रोका, तो उसके दस्तावेजों में विसंगतियां पाई गईं। कड़ी पूछताछ के बाद उसकी असली पहचान म्यांमार की नागरिक के रूप में उजागर हुई।

​कानूनी कार्रवाई और आगे की जांच

गिरफ्तार महिला को कानूनी औपचारिकताओं के बाद न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। वर्तमान में पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां संयुक्त रूप से इस मामले की जांच कर रही हैं। जांच का मुख्य केंद्र यह है कि वह भारत में कब से रह रही थी फर्जी दस्तावेज बनवाने में किन लोगों ने उसकी मदद की और उसके थाईलैंड जाने का वास्तविक उद्देश्य क्या था। साथ ही सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे मामले के अंतरराष्ट्रीय लिंक और आतंकी या मानव तस्करी जैसे कोणों की भी गहन पड़ताल कर रही हैं। यह मामला भारत की सुरक्षा व्यवस्था और बॉर्डर पार से होने वाली संदिग्ध गतिविधियों को लेकर एक बड़ा अलर्ट है।