Rajasthan News: उच्चतम न्यायालय ने सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती के 814वें सालाना उर्स के दौरान अजमेर शरीफ दरगाह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चादर चढ़ाने से रोकने की मांग को लेकर पेश याचिका सोमवार को खारिज कर दी। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि याचिका में उठाया गया मुद्दा सुनवाई योग्य नहीं है।

वैसे भी यह अप्रासंगिक हो गया है, क्योंकि चादर चढ़ाने का कार्यक्रम पहले ही हो चुका है। पीठ ने हालांकि स्पष्ट किया कि उसके आदेश का दरगाह से जुड़े अजमेर अदालत में चल रहे दीवानी मुकदमे पर कोई असर नहीं पड़ेगा। न्यायालय ने कहा, मुकदमा लंबित है, उसे जारी रखें।
पीठ ने यह भी कहा कि अजमेर शरीफ दरगाह पर चादर चढ़ाना पुरानी परंपरा है। इसका पालन पिछले प्रधानमंत्रियों ने भी किया है। यह याचिका हिंदू सेना के तत्कालीन अध्यक्ष विष्णु गुप्ता की अजमेर अदालत में पहले से दायर लंबित मुकदमे का हिस्सा है, जिसमें दावा किया गया था कि अजमेर शरीफ दरगाह तोड़े गये शिव मंदिर की जगह पर बनायी गयी थी। गुप्ता ने तर्क दिया था कि केंद्र सरकार ने जहां चादर चढ़ाने के लिए भेजा है, वह ‘विवादित ढांचा’ है। उनका यह काम न्यायिक स्वतंत्रता और निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार को कमजोर करता है, जबकि मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है।
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