जयपुर। राजस्थान में पिछले तीन दिनों में आधा दर्जन भीषण सड़क हादसों ने 40 से ज्यादा लोगों की जान ले ली, जबकि दर्जनों गंभीर रूप से घायल हैं। पैदल चल रहे मासूम राहगीरों से लेकर बस यात्रियों तक, किसी ने भी नियम नहीं तोड़ा, फिर भी मौत ने उन्हें लील लिया। इन दर्दनाक घटनाओं से आहत राजस्थान हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए सख्त तेवर दिखाए हैं।

कोर्ट ने एडवोकेट राजेंद्र शर्मा की लेटर पेटिशन को PIL में तब्दील कर लिया। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायमूर्ति बलजिंदर सिंह संधू की खंडपीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल भरत व्यास व महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद को नोटिस थमाया। दोनों से 6 नवंबर तक विस्तृत जवाब मांगा गया है कि आखिर सड़कें कब तक कब्रगाह बनती रहेंगी?
एडवोकेट शर्मा ने कहा, मैंने सिर्फ एक चिट्ठी लिखी थी। कोर्ट ने उसे जनहित याचिका मानकर तुरंत सुनवाई शुरू कर दी। यह साबित करता है कि न्यायपालिका आम जनता की पीड़ा समझती है।
इन हादसों में सबसे दर्दनाक रहा शनिवार का नागौर बस-ट्रक भिड़ंत, जिसमें 12 लोग मारे गए। रविवार को जोधपुर में ट्राले ने बाइक सवारों को कुचला, 8 की मौत। सोमवार सुबह सीकर में दो ट्रकों की टक्कर से 11 यात्री जिंदा जल गए। घायलों में कई की हालत नाजुक बनी हुई है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने हाईलेवल बैठक बुलाई। परिवहन मंत्री को तलब कर सड़क सुरक्षा के पुराने आदेश दोहराए गए। मगर सवाल वही-कब तक कागजी निर्देश, कब तक खानापूरी?
हाईकोर्ट का यह कदम इसलिए अहम है क्योंकि अब केंद्र व राज्य सरकार को एक साथ जवाब देना होगा। कोर्ट पूछेगा-
- ओवरलोडिंग पर क्यों नहीं लगाम?
- हाईवे पर स्पीड ब्रेकर क्यों गायब?
- ड्राइवरों की नींद की जांच कौन करेगा?
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