Rajasthan News: झालावाड़ स्कूल हादसे के बाद सरकारी स्कूलों की जर्जर इमारतों पर सरकार की रिपोर्ट राजस्थान हाईकोर्ट को रास नहीं आई। कोर्ट ने गुरुवार को सरकार के एक्शन प्लान को अधूरा बताते हुए सख्त फटकार लगाई और दोबारा पूरा रोडमैप पेश करने का आदेश दिया।

जस्टिस महेंद्र गोयल और जस्टिस अशोक कुमार जैन की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि राज्य सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि आखिर 86 हजार खराब कमरों की मरम्मत सीमित समय में कैसे होगी। अदालत ने टिप्पणी की चुनावी घोषणाओं की बात छोड़िए, धरातल पर काम दिखना चाहिए। आप 2047 के विजन की बातें करते हैं, लेकिन स्कूलों की आज की स्थिति के लिए भी तैयार नहीं हैं।
कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि सरकार की ओर से जो रिपोर्ट दी गई है, उसमें हर प्रभावित स्कूल भवन की स्थिति और मरम्मत की ठोस कार्ययोजना का विवरण नहीं है। खंडपीठ ने याद दिलाया कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट गाइडलाइन फॉर स्कूल सेफ्टी-2016 को लागू करना जरूरी बता चुका है।
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) की ओर से पेश हुए एडवोकेट वागीश सिंह ने कहा कि अदालत ने स्पष्ट रूप से नाराजगी जताई और निर्देश दिया कि सरकार नई रिपोर्ट तैयार करे, जिसमें बताया जाए कि सभी जर्जर स्कूल भवनों की मरम्मत कब और कैसे होगी।
अब राज्य सरकार को 24 नवंबर तक नया एक्शन प्लान और एफिडेविट पेश करना होगा। अदालत ने यह भी कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करे कि स्कूल भवनों का इंफ्रास्ट्रक्चर 2016 की सुरक्षा गाइडलाइनों के अनुरूप हो, ताकि भविष्य में किसी हादसे की पुनरावृत्ति न हो।
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