Rajasthan News: राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बुधवार को प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने सीधे सुप्रीम कोर्ट, चुनाव आयोग और केंद्र की मोदी सरकार पर कड़े सवाल दागे। गहलोत ने साफ लफ्जों में कहा कि आज देश में चुनाव आयोग निष्पक्ष नहीं रहा। वह भाजपा के एक विभाग की तरह काम कर रहा है।

बंगाल चुनाव तुरंत रोकने की थी जरूरत

गहलोत ने पश्चिम बंगाल के चुनावी माहौल को लेकर गहरी चिंता जताई। सूत्रों के मुताबिक, बंगाल में 27 लाख वोटों को लेकर मचे घमासान पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी को उन्होंने गलत बताया। गहलोत ने कहा कि कोर्ट का यह कहना कि अगली बार वोट डाल देना बिल्कुल उचित नहीं था। जनता का वोटिंग का अधिकार तो इसी चुनाव में था। जब तक इन 27 लाख वोटों पर अंतिम फैसला नहीं आता, तब तक चुनाव आयोग को बंगाल में चुनाव कम से कम 3 से 6 महीने के लिए टाल देने चाहिए थे। उन्होंने टीएन शेषन के दौर का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले गड़बड़ी होने पर चुनाव रोक दिए जाते थे, लेकिन आज ऐसा नहीं है।

जजों को सीधे किए जा रहे हैं फोन

न्यायपालिका की मौजूदा स्थिति पर भी पूर्व मुख्यमंत्री ने हैरान करने वाले दावे किए। उन्होंने कहा कि आज देश की न्यायपालिका पूरी तरह दबाव में है। जजों को सीधे फोन करके उन पर प्रेशर बनाया जाता है। गहलोत ने अपना उदाहरण देते हुए कहा कि मैंने अपने राजनीतिक जीवन में आज तक कभी किसी जज को फोन नहीं किया। पहले मुख्यमंत्रियों के हाथ में सिफारिश होती थी, लेकिन न्यायपालिका का एक अलग सम्मान होता था। आज सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जजों के साथ मजाक हो रहा है। ईडी (ED) जैसी एजेंसियां भी दबाव में काम कर रही हैं।

क्या बीजेपी वाले ही राम भक्त हैं?

गहलोत ने बीजेपी की राष्ट्रवाद और धर्म की राजनीति पर भी तीखा प्रहार किया। उन्होंने युवाओं से आगे आने की अपील करते हुए कहा कि देश का भविष्य खतरे में है। राम के नाम पर जो हो रहा है, क्या उससे सिर्फ बीजेपी वाले ही हिंदू साबित होते हैं? उन्होंने पुराना आंकड़ा देते हुए कहा कि 2014 में मोदी को सिर्फ 31% वोट मिले थे, तो क्या बाकी 70% वोट देने वाले लोग हिंदू नहीं थे?

इसके अलावा गहलोत ने राजस्थान की भजनलाल सरकार को भी घेरा। उन्होंने कहा कि जयपुर में 500 से ज्यादा नाले खुले पड़े हैं और ठेकेदारों को भुगतान न मिलने से सड़कों की मरम्मत रुकी हुई है। उन्होंने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार की ‘उड़ान योजना’ को तुरंत दोबारा चालू करने की मांग की, जिससे गरीब बच्चियों को सेनेटरी नैपकिन मिल सके।

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