Rajasthan Nikay Chunav 2026: राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव की तस्वीर अब साफ होने लगी है। स्वायत्त शासन विभाग ने शहरी निकायों के प्रमुख पदों के लिए लॉटरी निकालकर आरक्षण तय कर दिया है। प्रदेश के 309 शहरी निकायों में 10 नगर निगम के मेयर, 51 नगर परिषद के सभापति और 248 नगर पालिकाओं के चेयरमैन पदों का आरक्षण तय हुआ। लॉटरी की प्रक्रिया शासन सचिव रवि जैन की अध्यक्षता में हुई और सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि सभागार में मौजूद रहे।

6 नगर निगम महिलाओं के लिए आरक्षित

राजस्थान के 10 नगर निगमों में से 6 के मेयर पद महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं। इनमें अजमेर, पाली, भीलवाड़ा, अलवर और भरतपुर नगर निगम मेयर का पद सामान्य महिला के लिए आरक्षित हुआ है। वहीं कोटा नगर निगम का मेयर पद ओबीसी महिला के लिए आरक्षित किया गया है। दूसरी ओर जोधपुर, जयपुर, उदयपुर और बीकानेर नगर निगम मेयर पद सामान्य वर्ग के लिए रखे गए हैं।

बड़े नेताओं के गढ़ में क्या है आरक्षण?

निकाय चुनाव के आरक्षण में प्रदेश के कई बड़े नेताओं के प्रभाव वाले क्षेत्रों की तस्वीर भी सामने आ गई है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह क्षेत्र की नदबई नगर पालिका अध्यक्ष की सीट अनारक्षित है। यानी इस पद पर किसी वर्ग के लिए आरक्षण लागू नहीं है।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा की नगर पालिका लक्ष्मणगढ़ का अध्यक्ष पद भी अनारक्षित रखा गया है। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की नगर पालिका झालरापाटन में अध्यक्ष पद सामान्य वर्ग के लिए है। केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के प्रभाव वाले जोधपुर नगर निगम का मेयर पद भी सामान्य वर्ग के लिए अनारक्षित है।

वहीं लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के संसदीय क्षेत्र कोटा में नगर निगम मेयर का पद ओबीसी महिला के लिए आरक्षित किया गया है।

अजमेर से टोंक तक बदली तस्वीर

विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी के अजमेर नगर निगम का मेयर पद सामान्य महिला के लिए आरक्षित हुआ है। हनुमान बेनीवाल के लोकसभा क्षेत्र में आने वाले नागौर नगर परिषद के सभापति का पद ओबीसी के लिए आरक्षित किया गया है। वहीं सचिन पायलट के विधानसभा क्षेत्र टोंक में नगर परिषद सभापति का पद अनारक्षित रखा गया है।

अब चुनावी दावेदारियों पर नजर

शहरी निकायों के प्रमुख पदों का आरक्षण तय होने के बाद अब चुनावी समीकरण और दावेदारियों की तस्वीर बदलने की संभावना है। 309 शहरी निकायों में आरक्षण की स्थिति साफ होने से राजनीतिक दलों के सामने उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया का अगला चरण शुरू होगा।

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