Rajasthan UCC Draft News: राजस्थान में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर बड़ी अपडेट सामने आई है। समान नागरिक संहिता प्रारूप समिति ने शनिवार को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को विधेयक का प्रारूप सौंप दिया। समिति ने करीब 14 लाख सुझावों पर विचार करने के बाद यह ड्राफ्ट तैयार किया है। प्रस्तावित प्रावधानों में आदिवासियों को छोड़कर सभी धर्मों और जातियों के लिए विवाह की न्यूनतम आयु तय करने और प्रदेश में बहुविवाह पर रोक जैसे प्रावधान शामिल बताए जा रहे हैं। लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले लोग भी इसके दायरे में आ सकते हैं।

मुख्यमंत्री को सौंपी गई UCC की रिपोर्ट
समिति के सदस्य बसंत सिंह छाबा, रामस्वरूप अग्रवाल, डॉ. शुचि चौहान और अतिरिक्त मुख्य सचिव भास्कर ए. सावंत शनिवार शाम मुख्यमंत्री आवास पहुंचे। यहां उन्होंने विधि मंत्री जोगाराम पटेल की मौजूदगी में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को समिति की प्रमुख सिफारिशों और प्रस्तावित प्रावधानों की जानकारी दी। समिति की अध्यक्ष और सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश रंजना पी. देसाई तथा गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक में मौजूद रहे।
14 लाख से ज्यादा सुझावों के आधार पर तैयार हुआ ड्राफ्ट
सूत्रों के अनुसार, समिति को UCC के लिए बड़ी संख्या में सुझाव मिले। वेबपोर्टल के जरिए 1.48 लाख से अधिक सुझाव प्राप्त हुए, जबकि व्हाट्सऐप के माध्यम से 12.34 लाख से अधिक सुझाव आए। इसके अलावा समिति के सदस्यों ने संभाग मुख्यालयों पर अलग-अलग वर्गों के लोगों से चर्चा की और उनके सुझाव भी लिए। इन सुझावों और विभिन्न पहलुओं के अध्ययन के बाद समिति ने विधेयक का प्रारूप तैयार किया है।
आदिवासियों को UCC से बाहर रखने का प्रावधान
प्रस्तावित विधेयक में आदिवासियों को इसके दायरे से बाहर रखने की बात सामने आई है। सूत्रों के अनुसार, इसके पीछे संवैधानिक कारण बताए गए हैं। समिति ने राजस्थान के UCC ड्राफ्ट को तैयार करने के दौरान उत्तराखंड और गुजरात के कानूनी प्रावधानों का अध्ययन किया। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों को भी ध्यान में रखा गया। उत्तराखंड में UCC लागू है। वहीं गुजरात में इससे संबंधित विधेयक विधानसभा से पारित हो चुका है, लेकिन अभी कानून का रूप नहीं ले सका है।
शादी से लेकर लिव-इन तक लागू हो सकते हैं समान नियम
प्रस्तावित UCC में व्यक्तिगत और पारिवारिक मामलों से जुड़े कई प्रावधान शामिल बताए जा रहे हैं। इनमें विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और संपत्ति जैसे विषय शामिल हैं। हालांकि, अंतिम कानूनी प्रावधान विधेयक और उसके बाद की विधायी प्रक्रिया से स्पष्ट होंगे।
- सभी धर्मों और जातियों के लिए विवाह की न्यूनतम आयु के समान नियम।
- प्रदेश में बहुविवाह पर रोक।
- लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले लोगों के लिए भी कानूनी प्रावधान।
- विवाह पंजीकरण से जुड़े नियम।
- तलाक के लिए समान कानूनी प्रावधान।
- उत्तराधिकार और संपत्ति से जुड़े अधिकारों में समानता का प्रावधान।
क्या है Uniform Civil Code?
UCC यानी Uniform Civil Code का उद्देश्य नागरिकों के विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और संपत्ति जैसे व्यक्तिगत मामलों में समान कानूनी नियम लागू करना है। UCC का मतलब धार्मिक रीति-रिवाजों को खत्म करना नहीं है। इसका उद्देश्य व्यक्तिगत कानूनों के उन हिस्सों में समान कानूनी व्यवस्था तैयार करना है, जो नागरिक अधिकारों और पारिवारिक मामलों से जुड़े हैं।
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